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18वां BRICS शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली में जुटे वैश्विक दिग्गज, भारत मंडपम से दुनिया को नया संदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read
नई दिल्ली । 
भारत की राजधानी नई दिल्ली का ऐतिहासिक भारत मंडपम आज वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, रणनीतिक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और बहुपक्षीय सुधारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के लिए सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित विस्तारित BRICS परिवार के प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं।

भू-राजनीतिक संतुलन और द्विपक्षीय बैठकों पर नज़र

1. मोदी-पुतिन वार्ता: कूटनीति, रक्षा और ऊर्जा साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक है।
  • यूक्रेन संघर्ष: भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि युद्ध का समाधान केवल ‘संवाद और कूटनीति’ (Dialogue & Diplomacy) से ही संभव है।
  • ऊर्जा व परमाणु सुरक्षा: वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आ रहे बदलावों के बीच भारत-रूस तेल आपूर्ति और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

2. मोदी-पेजेशकियन बैठक: समुद्री सुरक्षा और कनेक्टिविटी

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक में भारत का प्राथमिक फोकस समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) पर है।
  • व्यापारिक मार्ग: अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करना भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC): भारत और ईरान व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए चाबहार पोर्ट और INSTC परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।

BRICS Payment System: डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम

सम्मेलन के आर्थिक एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा BRICS Cross-Border Payment System को विकसित करना है।
[स्थानीय मुद्रा व्यापार] ──► [डी-डॉलराइजेशन / कम लागत] ──► [सुरक्षित व तेज डिजिटल भुगतान]
  • कम लागत और तीव्र गति: सदस्य देश अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार करने के तंत्र को सुदृढ़ कर रहे हैं।
  • तकनीकी ढांचा: हालांकि अंतिम समयसीमा और तकनीकी संरचना पर फैसला आधिकारिक घोषणापत्र (New Delhi Declaration) से स्पष्ट होगा, लेकिन इस व्यवस्था से सीमा-पार लेनदेन की लागत और समय में भारी कमी आने की संभावना है।

Global South की सशक्त आवाज़ और संस्थागत सुधार

BRICS के हालिया विस्तार के बाद यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत अपनी अध्यक्षता में दो मुख्य प्राथमिकताओं को आगे बढ़ा रहा है:
  1. बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार: संयुक्त राष्ट्र (UN), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं की संरचना में बदलाव ताकि विकासशील देशों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
  2. मानवता-प्रथम (Humanity First) दृष्टिकोण: आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में BRICS देशों के बीच तालमेल बढ़ाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. 18वां BRICS शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित हो रहा है?

18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली स्थित ‘भारत मंडपम’ (प्रगति मैदान) में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित किया जा रहा है।

2. इस वर्ष BRICS सम्मेलन की थीम क्या है?

भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है।

3. BRICS Payment System का क्या फायदा होगा?

इसके माध्यम से सदस्य देश अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में सीधा व्यापार कर सकेंगे, जिससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटेगी और सीमा-पार व्यापार में लेनदेन शुल्क व समय कम होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान जारी आधिकारिक बयानों, प्रेस वार्ताओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक विवरण है। अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं और घोषणापत्रों के अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक सरकारी विज्ञप्ति के अधीन हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।