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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म परिवर्तन से स्वतः समाप्त नहीं होगा SC/ST दर्जा, जानें क्या है कानून

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read
प्रयागराज | 
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी कानूनी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल धर्म परिवर्तन कर लेने से किसी व्यक्ति का अनुसूचित जनजाति का दर्जा अपने आप (स्वतः) समाप्त नहीं हो जाता।
हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ST दर्जा तय करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक संबंधित व्यक्ति की अपनी मूल जनजातीय पहचान और समुदाय से उसका वास्तविक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक जुड़ाव है।

धर्म परिवर्तन और ST दर्जे के बीच कानूनी संबंध

भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों (ST) की सूची राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित की जाती है। किसी समुदाय या व्यक्ति को ST दर्जा उसके विशिष्ट जनजातीय स्वरूप, अलग सामाजिक पहचान और संवैधानिक अधिसूचना के आधार पर दिया जाता है, न कि केवल उसके व्यक्तिगत धार्मिक विश्वास के आधार पर।
अदालत के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदल लेता है, तो यह मान लेना गलत होगा कि उसने अपनी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और समुदाय से संबंध पूरी तरह समाप्त कर लिए हैं। असली सवाल यह है कि क्या वह व्यक्ति अभी भी अपनी मूल जनजाति का हिस्सा है और उसकी सामाजिक पहचान बरकरार है या नहीं।

जनजातीय पहचान साबित करना क्यों अनिवार्य है?

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी ST दर्जे या आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को अपनी जनजातीय पहचान स्थापित करनी पड़ सकती है।
इसके लिए निम्नलिखित साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: व्यक्ति का परिवार और रिश्तेदार उस जनजाति के रीति-रिवाजों का पालन करते हैं या नहीं।
  • समुदायिक साक्ष्य: क्या मूल जनजातीय समुदाय उस व्यक्ति को अपने हिस्से के रूप में स्वीकार करता है।
  • संवैधानिक दस्तावेज: वैध जाति/जनजाति प्रमाण पत्र और अन्य प्रासंगिक कागजात।

सरकारी नौकरियों और आरक्षण पर इसका प्रभाव

भारत में ST दर्जा शिक्षा संस्थानों में प्रवेश, सरकारी नौकरियों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में मिलने वाले आरक्षण से सीधा जुड़ा हुआ है।
अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जहाँ धर्म परिवर्तन के बाद किसी व्यक्ति के ST प्रमाण पत्र और आरक्षण के अधिकार को अदालत या प्रशासनिक स्तर पर चुनौती दी जाती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल धर्म बदलने के आधार पर किसी का प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि उसने अपनी जनजातीय पहचान पूरी तरह खो दी है।

क्या हर धर्म परिवर्तन के बाद ST दर्जा बना रहेगा?

अदालत ने यह भी साफ किया है कि इसे एक सार्वभौमिक (Universal) नियम नहीं माना जा सकता।
प्रत्येक मामले का फैसला निम्नलिखित आधारों पर केस-टू-केस (Case-to-Case) किया जाएगा:
  1. संबंधित जनजाति की अपनी विशिष्ट परंपराएँ।
  2. संविधान के तहत जारी अधिसूचना की शर्तें।
  3. व्यक्ति का अपने समुदाय से वास्तविक संबंध और साक्ष्य।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: क्या धर्म बदलने के बाद किसी व्यक्ति का ST प्रमाण पत्र तुरंत रद्द हो जाता है?
उत्तर: नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के अनुसार धर्म परिवर्तन स्वतः ST दर्जा समाप्त करने का आधार नहीं है। इसके लिए जनजातीय पहचान का समाप्त होना साबित होना आवश्यक है।
Q2: क्या ST और SC (अनुसूचित जाति) के धर्म परिवर्तन के नियम समान हैं?
उत्तर: नहीं। अनुसूचित जाति (SC) के मामले में धार्मिक सीमाएँ (मुख्यतः हिंदू, सिख और बौद्ध) लागू होती हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मुख्य रूप से जनजातीय पहचान और संवैधानिक अधिसूचना पर आधारित होता है, धार्मिक आस्था पर नहीं।
Q3: धर्म परिवर्तन के बाद ST दर्जा बनाए रखने के लिए क्या साबित करना होगा?
उत्तर: व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि धर्म बदलने के बावजूद वह अपनी मूल अधिसूचित जनजाति की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणियों और भारतीय कानून के सामान्य सिद्धांतों पर आधारित एक शैक्षणिक एवं सूचनात्मक विश्लेषण है। इसे किसी व्यक्तिगत मामले में कानूनी सलाह (Legal Advice) न माना जाए। अपने विशिष्ट मामले के लिए कृपया किसी योग्य अधिवक्ता या कानूनी विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।