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उत्तर प्रदेश: पारीछा पावर प्लांट से बेतवा में गिरी फ्लाई ऐश, NGT ने जिला प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड से माँगा जवाब

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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झांसी । 
उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित पारीछा थर्मल पावर प्लांट (Parichha Thermal Power Plant) से निकलने वाली फ्लाई ऐश (कोयले की राख) के बेतवा नदी में कथित तौर पर जमा होने का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) पहुँच चुका है।
पर्यावरण और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर पड़ रहे बुरे प्रभावों को गंभीरता से लेते हुए NGT ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है।

बेतवा नदी में राख के विशाल टीले: जानें क्या है पूरा मामला?

याचिका में लगाए गए आरोपों के अनुसार, पारीछा पावर प्लांट से पिछले लंबे समय से फ्लाई ऐश बेतवा नदी के प्रवाह क्षेत्र में बहाई जा रही है। इसके कारण नदी के तल (River Bed) में राख की मोटी परत जम गई है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह के अवरुद्ध होने और जलीय जीवों के जीवन पर खतरा मंडराने की आशंका जताई गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि नदी के अंदर राख के तीन बड़े जमाव (टीले) साफ़ देखे जा सकते हैं:
  • प्रत्येक टीले का आकार: लगभग 180 फीट × 230 फीट।
  • ऊंचाई: ये राख के टीले नदी के पानी की सतह से करीब 4 फीट ऊपर तक उठ चुके हैं।

भारी धातुओं (Heavy Metals) से मंडराया जल प्रदूषण और स्वास्थ्य का खतरा

कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट की फ्लाई ऐश में कई जहरीले और हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। याचिका में आशंका व्यक्त की गई है कि इस राख में शामिल आर्सेनिक, सीसा (Lead), कैडमियम, क्रोमियम और पारा (Mercury) जैसी विषैली भारी धातुएं नदी के पानी में घुल रही हैं।
इससे न केवल पीने के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, बल्कि मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर भी इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।

जून 2026 में हुई थी संयुक्त प्रशासनिक जाँच

मामले से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, झांसी जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग की एक संयुक्त टीम ने 17 और 23 जून 2026 को मौके का निरीक्षण किया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान भी नदी क्षेत्र में राख पहुँचने और जमा होने के प्राथमिक साक्ष्य सामने आए थे, जिसके आधार पर अब ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है।

NGT की कार्यवाही और अगली सुनवाई की तिथि

NGT की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों (Power Plant Authorities & State Administration) को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस दौरान ट्रिब्यूनल द्वारा गठित जाँच समितियों की रिपोर्ट और अधिकारियों के जवाब का न्यायिक परीक्षण किया जाएगा।

संबंधित समाचार एवं संदर्भ (Related Links)

अधिक क्षेत्रीय एवं पर्यावरणीय समाचारों के लिए पढ़ें:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: बेतवा नदी में फ्लाई ऐश का मामला क्या है?
Ans: झांसी के पारीछा थर्मल पावर प्लांट से भारी मात्रा में फ्लाई ऐश (कोयले की राख) बेतवा नदी में जमा हो गई है, जिससे नदी के प्रवाह और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ने का आरोप है।
Q2: NGT ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
Ans: NGT ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।
Q3: इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
Ans: इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को तय की गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख न्यायाधिकरण (NGT) के समक्ष दायर याचिका और प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। फ्लाई ऐश प्रदूषण से जुड़े सभी आरोप फिलहाल न्यायिक विचाराधीन (Sub-Judice) हैं और इन्हें अंतिम रूप से स्थापित सत्य नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम फैसला NGT की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।