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बसपा छोड़कर आरएलडी में शामिल हुए सांसद मलूक नागर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। दलों के बीच जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है। इस बीच मायावती को बड़ा झटका लगा है। मलूक नागर ने बहुजन समाज पार्टी का साथ छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल (RLD) का दामन थाम लिया है। आइए जानते हैं कि कौन हैं मलूक नागर?

कौन हैं मलूक नागर?

हापुड़ जिले के रहने वाले मलूक नागर का जन्म 1964 में हुआ था। उन्होंने उपेरा में स्थित एचएनएस कॉलेज से हाईस्कूल और मेरठ के एएस इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने हापुड़ के एसएसवी डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद मलूक नागर ने बिजनेस शुरू कर दिया। वे यूपी के बड़े बिजनेसमैन भी हैं।

जानें मलूक नागर का राजनीतिक सफर

मलूक नागर यूपी के अमीर सांसद के रूप में जाने जाते हैं। साल 2006 में उन्होंने बसपा का दामन थामा था। उन्होंने साल 2009 में मेरठ से और 2014 में बिजनौर से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे। साल 2019 में सपा और बसपा ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था और मायावती ने बिजनौर से मलूक नागर को उम्मीदवार बनाया। मलूक नागर ने बंपर जीत हासिल की थी।

मलूक नागर के पास कितनी है संपत्ति

लोकसभा चुनाव 2019 के नामांकन में दाखिल हलफनामे के अनुसार, मलूक नागर के पास कुल प्रॉपर्टी 250 करोड़ रुपए है। अगर अचल संपत्ति की बात करें तो 115 करोड़ से ज्यादा है। उनपर 101.61 करोड़ रुपए का लोन भी है। इसे लेकर एसबीआई ने नागर और उनके भाई के खिलाफ नोटिस भेजा था। साथ ही आयकर विभाग ने उनके ठिकानों पर छापा भी मारा था।

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क्यों नाराज थे मलूक नागर

मलूक नागर वर्तमान में बिजनौर से सांसद हैं। उम्मीद थी कि इस बार फिर उन्हें उम्मीदवार घोषित किया जाएगा, लेकिन बसपा ने उनका टिकट काट दिया। मायावती ने चौधरी बिजेंद्र सिंह को बिजनौर सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। बसपा से टिकट कटने से मलूक नागर नाराज थे। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने बसपा से इस्तीफा दे दिया और आरएलडी ज्वाइन कर लिया।

साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।