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सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘पुष्पा 2: द रूल’ के हिंदी संस्करण को दी मंजूरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना अभिनीत फिल्म ‘पुष्पा 2: द रूल’ ने अपनी हिंदी संस्करण के लिए सेंसर प्रक्रिया पूरी कर ली है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने 3 दिसंबर को कुछ बदलावों की शर्त पर फिल्म को मंजूरी दे दी।

हिंदी संस्करण में भी किए गए बदलाव

फिल्म में किए गए प्रमुख बदलावों में ‘रामावतार’ शब्द को ‘भगवान’ से बदला गया गया है। वहीं एक संवाद को हिंदी में बदला गया है। इसके अलावा कुछ आपत्तिजनक शब्दों में भी बदलाव किए गए हैं। एक दृश्य जिसमें कटे हुए पैर को उड़ते हुए दिखाया गया था, उसे हटा दिया गया है। यह दृश्य पहले ही तेलुगु संस्करण से भी संपादित किया गया था। सेंसर बोर्ड ने धूम्रपान के दृश्यों में धूम्रपान से संबंधित चेतावनी जोड़ने का भी निर्देश दिया है।

तेलुगु संस्करण पहले ही हो चुका है पास

‘पुष्पा 2: द रूल’ का तेलुगु संस्करण 28 नवंबर को क्लियर हो चुका था, जिसमें एक आपत्तिजनक शब्द को तीन स्थानों पर हटाने की सिफारिश की गई थी। इसके अलावा ‘देंगुड्डी’ और ‘वेंकटेश्वर’ जैसे शब्दों को भी हटाया गया था। फिल्म के हीरो द्वारा कटा हुआ हाथ पकड़े हुए दृश्य को भी  संपादित किया गया था।

इतनी लंबी बनी है फिल्म

दोनों हिंदी और तेलुगु संस्करण को यू/ए प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। फिल्म की कुल अवधि 200.38 मिनट है। फिल्म का निर्देशन सुकुमार ने किया है। इसमें अल्लू अर्जुन, रश्मिका मंदाना, और फहाद फासिल महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। ‘पुष्पा 2: द रूल’ 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।

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पहले भाग ने की थी बंपर कमाई

गौरतलब है कि इस फिल्म का पहला भाग ‘पुष्पा: द राइज – पार्ट 1’ (2021) में रिलीज हुई थी। यह एक बड़ी हिट साबित हुई थी। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने 267 करोड़ रुपये की कमाई कर धमाल मचा दिया था। इस फिल्म में शानदार अदाकारी के लिए अल्लू अर्जुन को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।