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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को बुद्धिमत्तापूर्ण और संतुलित जवाब दिया : पी चिदंबरम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव शनिवार शाम हुए संघर्षविराम की घोषणा के साथ ही खत्म हो गया है. पाकिस्तान के बॉर्डर से लगने वाले राज्यों में अब हालात पूरी तरह से सामान्य हैं. भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देकर ये साबित कर दिया कि वह आतंकवाद को खत्म करने के लिए किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं करने वाला है. पाकिस्तान से हुए सीजफायर के बीच अब पीएम मोदी की नीतियों की जमकर तारीफ हो रही है. कांग्रेस नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने भी पीएम मोदी की युद्ध नीति की तारीफ की है.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपे अपने कॉलम में उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व क्षमता को खूब सराहा है. उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा पाकिस्तान को दिए गए जवाब को बुद्धिमत्तापूर्ण और संतुलित बताया. साथ ही उन्होंने अपने कॉलम में लिखा है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद देश में आक्रोश था. हर कोई इस आतंकी घटना के बाद आतंकियों से बदला लेने की मांग कर रहे थे. ऐसे माहोल में सरकार ने सीमित सैन्य कार्रवाई का रास्त चुनकर एक बड़ा युद्ध टाल दिया है.

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने जो कार्रवाई की वो बेहद सीमित और सुनियोजित थी. जिसका उद्देश्य आतंकी संगठनों की बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था. चिदंबरम ने अपने कॉलम में इस कार्रवाई को प्रधानमंत्री मोदी की समझदारी भरा कदम बताया है.

एयरस्ट्राइक की भी तारीफ की

चिदंबरम ने अपने लेख में भारतीय सेना द्वारा 7 मई को की गई एयरस्ट्राइक की भी तारीफ की है. उन्होंने लिखा कि भारती सेना की कार्रवाई वैध और लक्ष्य केंद्रीत था. भारतीय सेना ने अपनी एयरस्ट्राइक के दौरान सैन्य और रिहायशी इलाकों को निशाना नहीं बनाया था. यह मान लेना जरा जल्दबाजी होगी कि भारतीय सेना के इस एक्शन के बाद लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद और दर रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे आतंकी समूह पूरी तरह समाप्त हो गए हैं.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।