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अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तान में लश्कर के टॉप कमांडर अबू सैफुल्लाह को किया ढेर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. ऑपरेशन सिंदूर से सदमे में आए पाकिस्तान के आतंकियों के लिए एक और बुरी खबर सामने आई है. आरएसएस मुख्यालय नागपुर पर 2006 में हुए आतंकी हमले की साजिश रचने वाला लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर अबू सैफुल्लाह पाकिस्तान में मारा गया. लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अबू सैफुल्लाह को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर ढेर कर दिया. लश्कर का ये आतंकी अबू सैफुल्लाह नेपाल के जरिए आतंकी नेटवर्क को हैंडल कर रहा था. अबू सैफुल्लाह को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मतली फलकारा चौक के पास अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भून डाला. लश्कर का ये आतंकी भारत में तीन आतंकी हमलों में शामिल था.

नेपाल में संभालता था लश्कर का आतंकी मॉड्यूल

लश्कर के इस आतंकी का नाम अबू सैफुल्लाह उर्फ मोहम्मद सलीम उर्फ राज़ूल्लाह निज़ामनी था. जानकारी के मुताबिक ये नेपाल में लश्कर-ए-तैयबा का पूरा मॉड्यूल संभालता था. इसका मुख्य काम लश्कर की आतंकवादी गतिविधियों के लिए कैडर और आर्थिक मदद मुहैया कराना था.

भारत में इन तीन आतंकी हमलों में शामिल था अबू सैफुल्लाह

ये आतंकी नेपाल के रास्ते लश्कर के आतंकवादियों को भारत में भेजने का भी काम करता था. इसने नागपुर में संघ मुख्यालय पर 2006 में हुए हमले में भी मुख्य भूमिका निभाई थी. इसके अलावा सीआरपीएफ कैंप रामपुर पर 2001 में हुए हमले में भी इसकी बड़ी भूमिका थी. आईआईएससी बेंगलुरु पर 2005 में हुए हमले की साजिश में भी ये शामिल था.

कौन था अबू सैफुल्लाह?

लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर अबू सैफुल्लाह भारत में आतंकी हमले करवाने का काम करता था. अबू सैफुल्लाह उर्फ मोहम्मद सलीम ने नेपाल में अपना आतंकी नेटवर्क फैला रखा था और वहीं से भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों को अंजाम देता था. भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने अबू सैफुल्लाह को मोस्ट वांडेट आतंकियों की लिस्ट में डाल रखा था. इसी के चलते वो नेपाल छोड़कर वापस पाकिस्तान भाग गया था. पाकिस्तान में रहने के दौरान ही उसकी अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।