रविवार, सितंबर 20 2026 | 11:23:58 AM

सरकार ने आईबीपीएस द्वारा संचालित परीक्षाओं में उम्मीदवारों के सत्यापन के लिए आधार प्रमाणीकरण के स्वैच्छिक उपयोग को अधिसूचित किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने एसओ837 (पृष्ठ 1614-15/सी ) द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) को इसके द्वारा संचालित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान उम्मीदवारों की पहचान सत्यापित करने के लिए स्वैच्छिक आधार पर हां/नहीं या/और ई-केवाईसी प्रमाणीकरण सुविधा का उपयोग करके आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया गया है। आईबीपीएस ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ के तहत एक नामित ‘सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण’ है । यह अधिसूचना आधार अधिनियम, 2016 के संगत प्रावधानों के साथ पठित सुशासन (समाज कल्याण, नवोन्मेषण, ज्ञान) नियमावली, 2020  के लिए आधार सत्यापन के नियम 5 के तहत प्रकाशित की गई है। कथित अधिसूचना भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के परामर्श के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा अधिकार-पत्र के बाद जारी की गई है।

इस पहल का उद्देश्य बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में सुशासन को बढ़ावा देना और परीक्षा के दौरान प्रतिरूपण और अन्य कदाचारों पर अंकुश लगाकर भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को सुदृढ़ बनाना है। यह न केवल एक निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा बल्कि वास्तविक उम्मीदवारों को धोखाधड़ी पूर्ण गतिविधियों के कारण वंचित होने से भी बचाएगा। यह पहचान सत्यापन को सरल बनाएगा और उसमें तेजी लाएगा, प्रशासनिक बोझ को कम करेगा और समग्र परीक्षा तथा चयन प्रणाली में लोगों का विश्वास बढ़ाएगा।

राजपत्र अधिसूचना का लिंक संलग्न है

https://egazette.gov.in/(S(ah0mujgqxxi0pvmyp24tjyqp))/ViewPDF.aspx )

- Advertisement -

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।