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कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत फास्ट ट्रैक विलय के दायरे का विस्तार किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कंपनी अधिनियम, 2013 देश में कंपनियों के निगमन, उत्तरदायित्व, प्रशासन और विघटन को नियंत्रित करता है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 233 केंद्र सरकार [क्षेत्रीय निदेशकों को प्रत्यायोजित] के अनुमोदन से कुछ कंपनियों के विलय या एकीकरण (फास्ट ट्रैक विलय) का प्रावधान करती है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 233(1) (i) दो या अधिक छोटी कंपनियों और (ii) होल्डिंग कंपनी और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के बीच विलय/विभाजन की अनुमति देती है। धारा 233 केंद्र सरकार (कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय) को नियमों के माध्यम से, कंपनियों की अतिरिक्त श्रेणियां निर्धारित करने का अधिकार देती है जो ऐसी फास्ट ट्रैक प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं।

कारोबारी सुगमता और छोटी कंपनियों व स्टार्ट-अप कंपनियों को ऐसी फास्ट ट्रैक प्रक्रिया का लाभ उठाने की अनुमति देने के लिए, वर्ष 2021 में कंपनी (समझौता, व्यवस्था और समामेलन) नियम, 2016 (सीएए नियम) में संशोधन किया गया ताकि (क) दो या अधिक स्टार्ट-अप कंपनियों और (ख) एक या अधिक स्टार्ट-अप कंपनी और एक या अधिक छोटी कंपनियों के बीच विलय/विघटन के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रिया का दायरा बढ़ाया जा सके। तत्पश्चात, सितंबर, 2024 में सीएए नियमों में किए गए संशोधन के माध्यम से, भारत के बाहर निगमित एक होल्डिंग कंपनी एक हस्तांतरणकर्ता विदेशी कंपनी का भारत में निगमित उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (रिवर्स फ़्लिपिंग) के साथ विलय को भी फास्ट ट्रैक विलय प्रक्रिया के माध्यम से अनुमति दी गई है।

बजट भाषण (2025-2026) के पैरा 101 के अनुसरण में, ऐसे विलयों के दायरे को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस उद्देश्य के लिए, हितधारकों के परामर्श के बाद 4 सितंबर, 2025 को सीएए नियमों में संशोधन किया गया है। इस संशोधन के माध्यम से, निम्नलिखित अतिरिक्त श्रेणियों की कंपनियों के संबंध में विलय/विघटन को त्वरित विलय/विघटन प्रक्रिया का लाभ उठाने के लिए ऐसे नियमों के नियम 25 में शामिल किया गया है:-

दो या अधिक असूचीबद्ध कंपनियां (धारा 8 की कंपनियों को छोड़कर) जो बकाया ऋण, डिबेंचर या जमा की निर्धारित सीमा को पूरा करती हैं;

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होल्डिंग कंपनी और सहायक कंपनियां, उन मामलों को छोड़कर जहां हस्तांतरणकर्ता कंपनी एक सूचीबद्ध कंपनी है;

एक ही होल्डिंग कंपनी की दो या अधिक सहायक कंपनियां, उन मामलों को छोड़कर जहां हस्तांतरणकर्ता कंपनी एक सूचीबद्ध कंपनी है।

संबंधित संशोधन अधिसूचना (राजपत्र अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 603 (ई) दिनांक 04.09.2025) कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की वेबसाइट (www.mca.gov.in) पर उपलब्ध करा दी गई है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।