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दिल्ली बम ब्लास्ट में नाम आने के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी को भेजा गया नोटिस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. पुलिस ने मंगलवार को लाल किला विस्फोट मामले की जांच एक संभावित आतंकवादी हमले के रूप में की। जांच पुलवामा के डॉक्टर उमर नबी पर फोकस किया है। पुलवामा के इस डॉक्टर का संबंध फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से था, जिसका पर्दाफाश वहां से विस्फोटक बरामद होने के बाद हुआ था। वहीं विस्फोट के एक दिन बाद जम्मू कश्मीर पुलिस ने उमर की मां का डीएनए नमूना लिया, ताकि अवशेषों की पुष्टि हो सके।

सूत्रों ने बताया कि यह विस्फोट दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में कई स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा माने जा रहे संदिग्धों को पकड़ने के लिए की गई छापेमारी के बाद घबराहट और हताशा में किया गया। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से कइयों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इस विश्वविद्यालय से ही दिल्ली ब्लास्ट की प्लानिंग की गई है, जबकि इसे अंजाम देने में डॉक्टर शाहीन का अहम रोल रहा है। उसे और उसके भाई जावेद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साजिशकर्ताओं को खोज निकालने के आदेश दिए हैं। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कही है। इस बीच खुफिया और जांच एजेंसियां तेजी से छानबीन में जुटी हुई हैं।

साभार : नवभारत टाइम्स

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।