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जैश, गजवात-उल-हिंद और उमर जैसे आतंकियों की तुर्किये में हुई थी आतंकवादी घटनाओं को लेकर मीटिंग

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दिल्ली में बम धमाका करने वाले आतंकी डॉ. उमर के साथ जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद (जीयूएच) से जुड़े तीन आतंकी 2022 में तुर्किये गए थे। वहां अंकारा में उनकी मुलाकात हैंडलर उकासा से हुई। टेलीग्राम एप पर शुरू हुई बातचीत बाद में सिग्नल और सेशन पर स्थानांतरित हो गई। इसी दौरान साजिश रची, जिनमें गाड़ियों में आईईडी से धमाके शामिल थे।

उमर और मुजम्मिल ने 2023 से जनवरी, 2025 तक लाल किले की कई बार रेकी की। वे अगले साल गणतंत्र दिवस समेत महत्वपूर्ण अवसरों पर हमलों को अंजाम देना चाहते थे। आतंकियों की दिसंबर में दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने की साजिश थी।

इन्होंने हमले के लिए कारें खरीदीं। ह्यूंडई आई20 और लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार उसी साजिश का हिस्सा थी। 2022 से अब तक 2,900 किलो एनपीके और 350 किलो से ज्यादा विस्फोटक सामग्री जुटाई गई, जो 50 से अधिक आईईडी बनाने के लिए पर्याप्त थी। इसमें अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स भी शामिल थे।

सूत्रों ने बताया, कमरा नंबर 13 (जहां मुजम्मिल गनाई रहता था) और उमर उन नबी के कमरा नंबर 4 से बरामद सबूत एक सुनियोजित आतंकी साजिश की ओर इशारा करते हैं। नोटबुक और डायरियां कोडित संदर्भों, नामों और नंबरों से भरी थीं जिन पर 8 से 12 नवंबर की तारीखें लिखी थीं, जिससे पता चलता है कि डॉक्टर कई हमलों की योजना बना रहे थे। डायरियों पर ऑपरेशन शब्द बार-बार लिखा था।

सूत्रों ने बताया, उमर और मुजम्मिल दोनों कोरोना महामारी के दौरान अल-फलाह में एक के बाद एक शामिल हुए थे। उमर 2021 में और मुज़म्मिल उसके छह महीने बाद। डायरियों में 25-30 लोगों के नाम भी पाए गए, जिनमें से अधिकतर या तो जम्मू-कश्मीर, मुजम्मिल और उमर के गृह राज्य, या फरीदाबाद और आस-पास के इलाकों के हैं। इससे जांचकर्ताओं को इस सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की रूपरेखा का अंदाजा हुआ।

दिल्ली ब्लास्ट की मुख्य आरोपी शाहीन को लेकर हुआ ऐसा खुलासा
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई करने वाली डॉ. शाहीन ने कभी भी हिजाब नहीं पहना। वह हमेशा एक आम छात्रा की तरह सलवार शूट में ही रहती थीं। वहीं अब डॉ. शाहीन की पहचान एक आतंकी के रुप में है। ऐसे में एक टॉपर छात्रा का ब्रेन वॉश इस प्रकार किया गया कि वह अब दिल्ली ब्लास्ट की मुख्य आरोपी है।

डॉ. शाहीन के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों का कहना है, कि वह एक सामान्य छात्रा की तरह बर्ताव करती थी। वहीं एमडी में प्रवेश के दौरान अन्य नजदीकी बैच के कुछ चिकित्सकों का कहना है कि जब वह एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने घर गई और फार्माकोलॉजी विभाग में एमडी की पढ़ाई के लिए लौटी तो उनके व्यवहार में कुछ परिवर्तन देखने को मिला।

वह सबसे कटी-कटी रहने लगी। हालांकि तक किसी ने सोचा भी नहीं था, कि डॉ. शाहीन के मन में ऐसा भी कुछ ख्याल चल रहा है।

फार्माकोलॉजी विभाग में थी एकलौती छात्रा

एमबीबीएस की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करने के बाद रसायन विभाग की विशेषज्ञ डॉ. शाहीन ने फार्माकोलॉजी विभाग में प्रवेश लिया। इस संबंध में एमएलएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह बताते हैं कि फार्माकोलॉजी में एमडी की दो सीटे हैं। वहीं 2002 बैच में डॉ. शाहीन फार्माकोलॉजी विभाग की अकेली छात्रा थी। क्योंकि दूसरी सीट पर किसी ने प्रवेश नहीं लिया था।

क्या है फार्माकोलॉजी

फार्माकोलॉजी में दवाओं और रसायन विज्ञान के बारे में सिखाया जाता है कि वे मानव शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं। इसमें दवाओं के अवशोषण, वितरण, चयापचय और उत्सर्जन का अध्ययन, नई दवाओं का विकास और दवाओं के सुरक्षित व प्रभावी उपयोग के तरीके शामिल हैं। इस क्षेत्र में शरीर क्रिया विज्ञान, जैव रसायन विज्ञान और कोशिका एवं आणविक जीव विज्ञान जैसे कई मूलभूत विज्ञानों के ज्ञान और कौशल शामिल होते हैं।

गाड़ी शाहीन के नाम इस्तेमाल कर रहा था कोई और
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कथित कमांडर डॉ. शाहीन सईद की दूसरी कार अल फलाह यूनिवर्सिटी में गुरुवार को मिली है। डॉ. शाहीन ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के ही ब्लॉक नंबर 15 के फ्लैट नंबर 32 के पते पर सितंबर 2025 में ये कार खरीदी थी। जम्मू कश्मीर पुलिस से मिले इनपुट के बाद फरीदाबाद पुलिस की टीम ने यूनिवर्सिटी परिसर में कार ढूंढी और इसके आस-पास के इलाके को सील किया गया है। बम निरोधक दस्ता से भी कार की जांच कराई गई है।

8 नवंबर को इस केस में पहली स्विफ्ट कार बरामद हुई
इस सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के तहत लखनऊ से गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीन सईद से जम्मू कश्मीर पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। इसी पूछताछ में पता चला है कि वो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर है। धौज स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर से 30 अक्तूबर को गिरफ्तार किए गए डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब से पूछताछ के बाद 8 नवंबर को इस केस में पहली स्विफ्ट कार बरामद हुई थी।

ये कार भी डॉ. शाहीन के नाम पर थी और उसने डॉ. मुज्जमिल को ये कार प्रयोग करने के लिए दी थी। इसी कार से पहली बार 8 नवंबर को क्रिनकॉव राइफल, पिस्टल, मैगजीन व गोलियां मिले थे।

क्लियरेंस के बाद ही कार को हाथ लगाएगी पुलिस
अब इस मामले में डॉ. शाहीन के नाम पर रजिस्टर्ड दूसरी ब्रेजा कार मिली है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जम्मू कश्मीर पुलिस की पूछताछ में डॉ. शाहीन ने खुलासा किया है कि दोनों ही कारों का प्रयोग विस्फोटक लाकर फरीदाबाद में छुपाने में किया गया। इसी वजह से पुलिस ने पूरा एहतियात बरता। कार की जांच के लिए गुरुवार दोपहर बाद लगभग 4 बजे बम निरोधक दस्ता को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाया गया था।

साभार : अमर उजाला

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