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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया के लिए एक उभरता हुआ मॉडल है: शशि थरूर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है. रामनाथ गोयनका व्याख्यान में पीएम मोदी के भाषण की प्रशंसा की. थरूर ने लिखा, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब सिर्फ़ एक ‘उभरता हुआ बाज़ार’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक ‘उभरता हुआ मॉडल’ है, और इसके आर्थिक लचीलेपन का ज़िक्र किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन पर हमेशा चुनावी मूड में रहने का आरोप लगाया जाता रहा है, लेकिन असल में वे लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए भावनात्मक मूड में रहते हैं.

थरूर बोले, खुशी हुई 

थरूर ने एक्‍स पर लिखा, ‘कल रात इंडियन एक्‍सप्रेस के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रामनाथ गोयनका लेक्‍चर में शामिल हुआ. उन्होंने विकास के लिए भारत की ‘रचनात्मक बेचैनी’ पर बात की और उपनिवेशवाद-विरोधी मानसिकता पर जोरर दिया.’ थरूर ने लिखा, ‘कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संबोधन एक आर्थिक दृष्टिकोण और एक्‍शन के लिए एक सांस्कृतिक अपील दोनों था, जिसमें राष्ट्र को प्रगति के लिए बेचैन रहने की अपील की गई. बुरी तरह सर्दी-खांसी से जूझने के बावजूद दर्शकों के बीच उपस्थित रहकर खुशी हुई!’

पीएम मोदी का भाचनात्‍मक मोड 

थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ‘अब सिर्फ एक ‘उभरता हुआ बाजार’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक ‘उभरता हुआ मॉडल’ है, और उन्होंने इसकी आर्थिक क्षमता का जिक्र किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन पर हर समय ‘चुनावी मोड’ में रहने का आरोप लगाया जाता रहा है, लेकिन असल में वह लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘भावनात्मक मोड’ में थे.’ थरूर ने कहा कि भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैकाले की 200 साल पुरानी ‘गुलामी मानसिकता’ की विरासत को पलटने पर केंद्रित था.

साभार : एनडीटीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।