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चीन भारतीय सीमा के पास तिब्बत में सड़कों और हवाई पट्टियों का तेजी से कर रहा है विस्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बीजिंग. भारत को लेकर चीन का दोहरा रवैया एक बार फिर सामने आ रहा है। भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाला चीन सीमा के पास अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है। चीन की विस्तारवादी नीति किसी से छिपी नहीं है। वहीं, अब चीन की नजर तिब्बत से सटे क्षेत्रों पर है।

चीन तिब्बत के पास मौजूद LAC पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। इस दौरान चीनी सेना रसद से लेकर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और सीमा पर ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश में लगी है।

2 बार हो चुकी है झड़प

भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। 2017 के डोकलाम संघर्ष से लेकर 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते सामान्य होने के कयास लगाए जा रहे हैं। मगर, इसी बीच सीमा पर चीन की बढ़ती भागीदारी सवाल खड़े कर रही है।

तिब्बत में चीन का विस्तार

चीन ने तिब्बत में एक मानवरहित हवाई वाहन (UAV) का परीक्षण केंद्र बनाया है। 4300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह केंद्र चीनी सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में लड़ाई जारी रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा तिब्बत में 720 मीटर लंबे रनवे वाला सैन्य अड्डा भी बना है, जिसमें 4 हैंगर समेत कई चीजें शामिल हैं। यह सैन्य अड्डा चीनी सेना के लिए लॉजिस्टिक सेंटर का काम करेगा।

बता दें कि तिब्बत में विकास के नामपर चीन ने अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना में 30 अरब अमेरिकी डॉलर तिब्बत को आवंटित किए थे। चीन की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने तिब्बत के हाईवे नेटवर्क को दोगुना कर दिया है। इसके अलावा तिब्बत में कई सरकारी परियोजनाएं भी चलाई जा रहीं हैं। तिब्बत में रेल नेटवर्क भी मजबूत हो रहा है।

दक्षिण चीन सागर में भी पैर पसार रहा ड्रैगन

हालांकि, चीन सिर्फ भारतीय सीमा पर ही नहीं, बल्कि दक्षिणी चीन सागर में भी तेजी से विस्तार कर रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन ने अपना पहला आर्टिफिशियल आईलैंड बनाया है, जिसने अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।