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कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी अपने पालतू कुत्ते के साथ पहुंचीं संसद परिसर में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन आज (1 दिसंबर, सोमवार) कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी एक अनोखे विवाद में घिर गईं. दरअसल, वे अपनी गाड़ी में अपने पालतू कुत्ते के साथ संसद पहुंचीं. उनका यह वीडियो सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई और बीजेपी ने इसे संसद की गरिमा से खिलवाड़ बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर दी.

घटना पर जब मीडिया ने रेणुका चौधरी से सवाल किया, तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है. उन्होंने कहा, “इसमें क्या तकलीफ है? एक गूंगा जानवर अंदर आ गया तो कौन-सी बड़ी समस्या हो गई? यह छोटा-सा है, काटने वाला नहीं. काटने वाले तो और लोग हैं पार्लियामेंट के अंदर.” उनका यह बयान सामने आते ही विवाद और गहरा गया.

रेणुका चौधरी ने पीएम मोदी के बयान का दिया जवाब

रेणुका चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर की गई टिप्पणी पर भी जवाब दिया. उन्होंने पूछा कि यदि सरकार को सत्र को लेकर इतनी चिंता थी, तो एक महीने के तय सत्र को घटाकर महज पंद्रह दिन क्यों कर दिया गया? उन्होंने कहा, “आप क्यों घबरा रहे हैं कि हम हाउस में क्या मुद्दे उठाएंगे? क्या मुद्दे कम थे? फिर सत्र छोटा क्यों किया गया?”

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बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने लगाए आरोप

बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने रेणुका चौधरी पर विशेषाधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि संसद देश की नीतियों पर गंभीर चर्चा का मंच है, जहां इस तरह की हरकतें ‘लोकोत्तर आचरण’ और संसद की प्रतिष्ठा के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा, “अपने डॉग को लेकर संसद पहुंचना और उसके बाद ऐसी टिप्पणी करना देश को शर्मसार करता है. उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.” उन्होंने इसे लोकतंत्र का अपमान बताते हुए कड़ा रुख अपनाने की मांग की.

साभार : एबीपी न्यूज

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।