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मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और सुषमा स्वराज के पति स्वराज्य कौशल का 73 वर्ष की आयु में निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. नई दिल्ली में ताल कटोरा रोड स्थित अपने आवास पर 73 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। कौशल स्वराज पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति तथा नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता थे।

1986 में मात्र 34 वर्ष की आयु में सुप्रीम कोर्ट द्वारा वरिष्ठ वकील घोषित होने वाले स्वराज कौशल ने 1990 से 1993 तक मिजोरम के राज्यपाल के रूप में सेवा की, जहां वे देश के सबसे युवा राज्यपाल बने, और उन्होंने उत्तर-पूर्व क्षेत्र की विद्रोह समस्या पर विशेषज्ञता हासिल की।

उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक और कानूनी हलकों में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि ताल कटोरा रोड के उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू सहित अनेक प्रमुख नेताओं ने उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

भाजपा नेता सतीश उपाध्याय ने सोशल मीडिया पर उनके राष्ट्रसेवा में समर्पण और बुद्धिमत्ता की प्रशंसा की। उनका अंतिम संस्कार शाम साढ़े 4 बजे दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट पर संपन्न होगा, जहां परिवार और निकटजन उपस्थित रहेंगे।

सीएम रेखा गुप्ता ने जताया शोक

वहीं इनके निधन पर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने शोक जताया है। उन्होंने लिखा- मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल जी के निधन की खबर दुखद है। स्वराज कौशल जी का सार्वजनिक जीवन और विधि के क्षेत्र में योगदान हमेशा याद किया जाएगा। राष्ट्र और समाज के प्रति उनकी सेवा अविस्मरणीय है। दुःख की इस घड़ी में, मेरी गहरी संवेदनाएं सांसद बांसुरी स्वराज जी और उनके समस्त परिजनों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।

साभार : दैनिक जागरण

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।