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शैक्षणिक संस्थानों में कब्र खोदने वालों से सावधान रहें – आलोक कुमार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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राजधानी दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पवित्रता को देश के प्रधानमंत्री और दूसरों को निशाना बनाने वाले भद्दे नारों से फिर से नष्ट किया गया है। इस बार उकसावे की वजह दिल्ली दंगों के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत न मिलना बताया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि प्रॉसीक्यूशन के पास दोनों के खिलाफ दंगों में शामिल होने से जुड़े सीधे और पुष्टि करने वाले सबूत हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने ने दिल्ली में वर्ष 2020 में हिन्दुओं पर हुए सुनियोजित हमलों के पीछे बड़े षड़्यंत्र से जुड़े अपराधों में उनकी “केंद्रीय और मुख्य भूमिका” पर भी ध्यान दिया।

उमर और शरजील पर भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ साज़िश रचने का आरोप है। यह जघन्य अपराध है। यह सभी के लिए उचित होगा कि वे ट्रायल का इंतज़ार करें, जहां आरोपियों को अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुट्ठी भर लोगों ने सब्र रखने की बजाय, आधी रात को जेएनयू कैंपस का माहौल खराब करने का दुस्साहस किया। यह शर्मनाक और कायरतापूर्ण है। यूनिवर्सिटी ने एफआईआर दर्ज कराई है। इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।

लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी मनमानी करने का लाइसेंस नहीं देती। कब्र खोदने के नारे ऐसे अधिकारों का उल्लंघन हैं, अभद्र और आपराधिक हैं।

ये नारे देशवासियों को अंदरूनी खतरों की याद दिलाते हैं और यह याद दिलाते हैं कि हमेशा सतर्क रहना ही आज़ादी की कीमत है।

आलोक कुमार

अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद

 

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।