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कोचिंग सेंटर्स के लिए नई गाइडलाइन: छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में बढ़ते तनाव और आत्महत्या के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार की समिति ने कोचिंग सेंटर्स के संचालन के तरीकों में बड़े बदलाव करने का सुझाव दिया है।

1. पढ़ाई के घंटों में बड़ी कटौती (2-3 घंटे की सीमा)

समिति के सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक है कोचिंग क्लास की अवधि को सीमित करना। प्रस्ताव के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना की कक्षाओं को केवल 2 से 3 घंटे तक ही सीमित रखें। वर्तमान में कई संस्थानों में छात्र 7 से 8 घंटे तक लगातार पढ़ाई करते हैं, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाते हैं।

2. स्कूल और कोचिंग के बीच संतुलन

नई गाइडलाइन में इस बात पर जोर दिया गया है कि कोचिंग कक्षाएं स्कूल के समय के दौरान आयोजित नहीं की जानी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्र अपनी नियमित स्कूली शिक्षा पर ध्यान दे सकें और उन पर “दोहरी पढ़ाई” का बोझ न पड़े।

3. तनाव मुक्त वातावरण और काउंसलिंग

समिति ने सिफारिश की है कि कोचिंग सेंटर्स को केवल पढ़ाई का केंद्र न बनकर छात्रों के सहायक के रूप में कार्य करना चाहिए। इसके तहत:

  • संस्थानों में प्रोफेशनल काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य हो।

  • छात्रों के लिए समय-समय पर ‘मेंथल हेल्थ चेकअप’ आयोजित किए जाएं।

  • सकारात्मक माहौल बनाने के लिए योग और खेलकूद जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाए।

4. पारदर्शी फीस और रिफंड पॉलिसी

अक्सर देखा गया है कि भारी-भरकम फीस भरने के बाद छात्र दबाव महसूस करते हैं। समिति ने प्रस्ताव दिया है कि अगर कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ना चाहता है, तो उसकी बाकी फीस वापस (Refund) करने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए।

5. भ्रामक विज्ञापनों पर रोक

कोचिंग संस्थान अक्सर टॉपर्स की तस्वीरों का उपयोग करके बढ़ा-चढ़ाकर दावे करते हैं। नई गाइडलाइन के तहत ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि अभिभावकों और छात्रों को गलत उम्मीदें न दी जाएं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।