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सावधान! शरीर पर बेअसर हो रही हैं एंटीबायोटिक दवाएं, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. आज के दौर में एक मामूली सर्दी-जुकाम या घाव होने पर हम तुरंत मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर खा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह ‘झटपट इलाज’ की आदत भविष्य में आपकी जान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है? हालिया अंतरराष्ट्रीय शोध और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चेतावनियां संकेत दे रही हैं कि दुनिया एक ऐसे ‘पोस्ट-एंटीबायोटिक युग’ में प्रवेश कर रही है, जहाँ मामूली संक्रमण भी लाइलाज हो जाएगा।

1. क्या है ‘एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस’ (AMR)?

जब बैक्टीरिया, वायरस और फंगस समय के साथ खुद को इस तरह बदल लेते हैं कि उन पर मौजूदा दवाएं बेअसर हो जाती हैं, तो इसे ‘एंटीबायोटिक प्रतिरोध’ कहा जाता है। ऐसे बैक्टीरिया को विज्ञान की भाषा में ‘सुपरबग’ (Superbug) कहते हैं।

2. हालिया रिसर्च के चौंकाने वाले दावे

‘द लैंसेट’ (The Lancet) और अन्य प्रमुख मेडिकल जर्नल्स की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • लाखों मौतें: हर साल दुनिया भर में करीब 50 लाख से अधिक मौतें एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने के कारण हो रही हैं।

  • भारत पर खतरा: भारत में ‘एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ की दर दुनिया में सबसे अधिक है। यहां सामान्य संक्रमण जैसे टाइफाइड और निमोनिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ‘फर्स्ट लाइन’ दवाएं अब 70% तक बेअसर हो चुकी हैं।

  • 2050 का संकट: शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2050 तक हर साल 1 करोड़ लोग केवल इसलिए मरेंगे क्योंकि उन पर दवाएं काम नहीं करेंगी।

3. शरीर पर दवाएं बेअसर होने के 3 प्रमुख कारण

क. दवाओं का अत्यधिक और गलत उपयोग

लोग बिना डॉक्टर की सलाह के छोटी-मोटी बीमारियों के लिए ‘एज़िथ्रोमाइसिन’ या ‘एमोक्सिसिलिन’ जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया पर काम करती हैं, वायरस (जैसे सामान्य फ्लू) पर नहीं।

ख. कोर्स अधूरा छोड़ना

अक्सर मरीज दो दिन दवा खाने के बाद ठीक महसूस करने पर कोर्स बंद कर देते हैं। इससे शरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते, बल्कि वे उस दवा के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं।

ग. भोजन की थाली में एंटीबायोटिक

पशुपालन और पोल्ट्री फार्मिंग में जानवरों को जल्दी बड़ा करने और संक्रमण से बचाने के लिए भारी मात्रा में एंटीबायोटिक दिए जाते हैं। मांस और दूध के जरिए ये दवाएं अप्रत्यक्ष रूप से इंसानी शरीर में पहुंच रही हैं और हमें ‘ड्रग रेजिस्टेंट’ बना रही हैं।

4. सुपरबग से बचने के लिए क्या करें?

यह समस्या केवल डॉक्टरों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। हमें इन नियमों का पालन करना होगा:

  1. डॉक्टर की सलाह अनिवार्य: कभी भी ‘ओवर द काउंटर’ (OTC) एंटीबायोटिक न खरीदें।

  2. कोर्स पूरा करें: यदि डॉक्टर ने 5 दिन की दवा लिखी है, तो उसे पूरा खाएं, भले ही आप 2 दिन में ठीक हो जाएं।

  3. टीकाकरण: वैक्सीन के जरिए कई बीमारियों को रोका जा सकता है, जिससे एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

  4. स्वच्छता: हाथ धोने और स्वच्छ भोजन की आदत संक्रमण फैलने से रोकती है।

नोट : विशेषज्ञों की सलाह को ही अंतिम मानें 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।