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चाईबासा: थैलेसीमिया पीड़ित 5 बच्चों को चढ़ाया गया संक्रमित खून, झारखंड विधानसभा में भारी हंगामा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

राँची. झारखंड विधानसभा के चालू सत्र के दौरान शुक्रवार को चाईबासा का वह हृदयविदारक मामला गूंजा, जिसमें थैलेसीमिया से पीड़ित पांच मासूम बच्चे रक्त चढ़ाए जाने के दौरान एचआईवी (HIV) संक्रमण का शिकार हो गए थे। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हुई।

विपक्ष का सरकार पर हमला

निरसा से भाकपा माले विधायक अरूप चटर्जी ने इस मामले को सदन में उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आखिर इतने गंभीर मामले की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? विधायक ने सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए मांग की कि इसी सत्र के भीतर जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाए। भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने भी इसे स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

स्वास्थ्य मंत्री का स्पष्टीकरण और मुआवजा

जवाब में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है। उन्होंने सदन को निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारी दी:

  • आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से 2-2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।

  • मुफ्त इलाज: संक्रमित बच्चों के इलाज और पुनर्वास का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

  • जांच रिपोर्ट का तर्क: मंत्री ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में चढ़ाया गया खून ‘नॉन-रिएक्टिव’ पाया गया था, जिसका मतलब है कि शुरुआती जांच में खून सुरक्षित था। संक्रमण के सटीक स्रोत का पता लगाने के लिए गहन जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा

हंगामे के बीच स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य में ‘ब्लड सेपरेशन यूनिट’ स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि रक्त चढ़ाने से पहले हर स्तर पर कड़ाई से स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष: विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद ही सदन की स्थिति सामान्य हो सकी। हालांकि, जांच की स्पष्ट समय सीमा (Deadline) न मिलने से विपक्षी विधायक असंतुष्ट नजर आए।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।