नई दिल्ली. दुनियाभर में गहराते पश्चिम एशिया संकट और युद्ध के बादलों के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को लोकसभा में देश को आश्वस्त किया कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) और विमान ईंधन (ATF) की देश में कोई कमी नहीं है और सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
1. 27 से बढ़कर 40 देशों तक पहुँचा भारत का तेल नेटवर्क
मंत्री ने सदन को बताया कि भारत ने अपनी तेल कूटनीति में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं।
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विविधीकरण: वर्ष 2006-07 में भारत केवल 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है।
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रणनीति: आपूर्ति के स्रोतों में इस विविधता का बड़ा फायदा यह है कि अब भारत किसी एक भौगोलिक क्षेत्र (जैसे खाड़ी देश) में होने वाले तनाव का बंधक नहीं है।
भारत-रूस तेल समझौता: matribhumisamachar.com/russia-india-oil-deal
2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का डर हुआ कम
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर सबसे बड़ा खतरा होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का होता है, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है। इस पर मंत्री ने महत्वपूर्ण डेटा साझा किया:
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वैकल्पिक मार्ग: भारत ने गैर-होर्मुज मार्गों (Non-Hormuz routes) से होने वाले आयात को 55% से बढ़ाकर 70% कर दिया है।
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कूटनीतिक जीत: प्रधानमंत्री की कूटनीतिक पहल के कारण भारत ने ऐसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल की व्यवस्था की है, जो बाधित मार्गों की कमी को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
“नागरिक घबराकर (Panic Booking) एलपीजी सिलेंडर बुक न करें। देश में गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और घरेलू उत्पादन में 28% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।” – हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री
घरेलू गैस की कीमतें: matribhumisamachar.com/lpg-price-update
3. CNG और LPG की स्थिति: क्या है हकीकत?
आम जनता के बीच ईंधन की किल्लत की अफवाहों पर विराम लगाते हुए सरकार ने निम्नलिखित तथ्य रखे:
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CNG सप्लाई: सीएनजी की आपूर्ति 100% जारी है और इसमें कोई कटौती नहीं की गई है।
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घरेलू उत्पादन: भारत में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 28% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आयात पर निर्भरता घटी है।
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प्राथमिकता: किसी भी आपात स्थिति में अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं को बिना किसी रुकावट के ईंधन मिलता रहेगा।
भारत की विदेश नीति: matribhumisamachar.com/india-foreign-policy-energy
4. क्या कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा असर? (विशेष विश्लेषण)
हालांकि आपूर्ति सुनिश्चित है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक चुनौती बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास पर्याप्त स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और रूस जैसे देशों के साथ दीर्घकालिक समझौतों के कारण कीमतों के झटके को सहने की क्षमता बढ़ी है।
भारत वर्तमान में रूस से भारी मात्रा में रियायती तेल आयात कर रहा है, जिसने पश्चिम एशिया के संकट के असर को काफी हद तक कम कर दिया है।
मुख्य निष्कर्ष:
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भारत की ऊर्जा नीति अब ‘एक स्रोत’ पर निर्भर नहीं है।
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रसद (Logistics) के लिए नए और सुरक्षित समुद्री रास्तों का उपयोग हो रहा है।
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सरकार स्थिति की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है।
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