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कर्नाटक में ‘हिंदी’ का दबदबा: 93% छात्रों ने चुना तीसरी भाषा के रूप में, ग्रेडिंग सिस्टम ने बदली खेल की दिशा

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बेंगलुरु | गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

कर्नाटक के स्कूली शिक्षा परिदृश्य से एक चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण डेटा सामने आया है। राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026 में SSLC (कक्षा 10) के लगभग 93 प्रतिशत छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया है। भाषाई पहचान और ‘हिंदी थोपने’ के राजनीतिक विवादों के बीच, छात्रों का यह झुकाव राज्य की शिक्षा नीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।

आंकड़ों की जुबानी: हिंदी सबसे आगे

इस वर्ष राज्य बोर्ड के कुल 8.1 लाख छात्रों में से लगभग 7.5 लाख से अधिक छात्रों ने हिंदी को अपनी तीसरी भाषा के रूप में चुना है। इसकी तुलना में अन्य भाषाओं का चयन काफी कम रहा:

  • हिंदी: ~7,50,000 छात्र (92.57%)

  • अंग्रेजी: ~32,000 छात्र

  • कन्नड़: ~11,483 छात्र

  • अन्य (संस्कृत, उर्दू, अरबी): शेष छात्र

ग्रेडिंग प्रणाली: पसंद के पीछे का मुख्य ‘ट्रिगर’

विशेषज्ञों और शिक्षा विभाग का मानना है कि इस भारी रुझान का सबसे बड़ा कारण हाल ही में लागू की गई ग्रेडिंग प्रणाली है।

  • अंकों का बोझ खत्म: स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा के निर्णय के अनुसार, अब तीसरी भाषा के अंक कुल योग (Aggregate) में नहीं जुड़ेंगे। इसके बजाय, छात्रों को केवल A, B, C, D ग्रेड दिए जाएंगे।

  • पास-फेल का तनाव नहीं: तीसरी भाषा में अब कोई फेल नहीं होगा। इसने छात्रों को उस भाषा को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया है जिसे वे सीखने में आसान या व्यावहारिक समझते हैं।

व्यावहारिक और करियर संबंधी कारण

राजनीतिक बहसों से इतर, छात्र और अभिभावक हिंदी को एक ‘स्किल’ के रूप में देख रहे हैं:

  1. रोजगार के अवसर: भारत के अन्य राज्यों में माइग्रेशन और कॉर्पोरेट जगत में संवाद के लिए हिंदी को एक उपयोगी माध्यम माना जा रहा है।

  2. संसाधनों की उपलब्धता: राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में हिंदी शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों का नेटवर्क अन्य वैकल्पिक भाषाओं (जैसे संस्कृत या अन्य क्षेत्रीय भाषाएं) की तुलना में अधिक मजबूत है।

  3. NEP 2020 का प्रभाव: नई शिक्षा नीति के तहत त्रि-भाषा फॉर्मूले ने छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने की अधिक स्वतंत्रता दी है।

कर्नाटक शिक्षा समाचार: matribhumisamachar.com/karnataka-education-news

विवाद और चुनौतियां

हालांकि यह डेटा एक सकारात्मक शैक्षणिक बदलाव दिखा रहा है, लेकिन इसने नई बहस को भी जन्म दिया है:

  • राज्यपाल का हस्तक्षेप: कर्नाटक के राज्यपाल ने हाल ही में राज्य सरकार से ग्रेडिंग सिस्टम की समीक्षा करने को कहा है। कुछ संगठनों का तर्क है कि अंकों को हटाने से छात्र इस विषय को गंभीरता से नहीं लेंगे।

  • स्थानीय भाषाओं का भविष्य: कन्नड़ विकास प्राधिकरण (KDA) ने चिंता जताई है कि प्रमुख भाषाओं के दबदबे के कारण राज्य की अन्य 27 लघु (Micro) भाषाएं हाशिये पर जा सकती हैं।

भविष्य की राह

कर्नाटक सरकार अब 2026-27 से द्विभाषी शिक्षण (कन्नड़ और अंग्रेजी) को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है। लेकिन वर्तमान आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक का छात्र अब भाषाई दीवारों को तोड़कर अपनी वैश्विक और राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए व्यावहारिक विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।

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