अहमदाबाद । सोमवार, 15 जून 2026
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वडोदरा में एक बेशकीमती सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के मामले में सोमवार को गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें अपने दावों को साबित करने के लिए चार सप्ताह (4 हफ्ते) का अंतिम समय तो दे दिया है, लेकिन साथ ही एक बेहद सख्त चेतावनी भी जारी की है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में जितनी अधिक देरी होगी, यूसुफ पठान पर उतना ही बड़ा वित्तीय जुर्माना या हर्जाना (कब्जा शुल्क) लगाया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने क्या कहा?
गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रॉय की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जब यूसुफ पठान के वकील ने राज्य सरकार की एक नीति के तहत जमीन के आवंटन का दावा पेश करने के लिए समय मांगा, तो कोर्ट ने समय देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। हालांकि, कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:
“आप (यूसुफ पठान) साल 2014 से इस सरकारी जमीन पर काबिज हैं और इस पूरे समय के दौरान आपने एक भी पैसा नहीं चुकाया है। आप जितना अधिक समय लेंगे, आपको उतना ही अधिक हर्जाना भुगतना पड़ेगा। सरकारी संपत्ति पर बिना कानूनी अनुमति के कब्जा रखना कोई सामान्य बात नहीं है और इसके लिए बाजार दर के हिसाब से दंडात्मक हर्जाना देना पड़ सकता है।”
क्या है यूसुफ पठान का पक्ष?
अदालत में यूसुफ पठान के वरिष्ठ वकील की ओर से दलील दी गई कि वे कोर्ट से भाग नहीं रहे हैं, बल्कि राज्य सरकार की एक विशेष नीति (जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को जमीन आवंटन से जुड़ी है) के तहत इस जमीन पर अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं। उनके वकील का कहना है कि पूर्व में कई अन्य अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को भी इस नीति के तहत लाभ मिला है, इसलिए उन्हें भी उम्मीद है कि सरकार उनके दावे पर सकारात्मक विचार करेगी। इसी दावे को रिकॉर्ड पर लाने के लिए उन्होंने कोर्ट से 3-4 हफ्तों की मोहलत मांगी थी।
विवाद की पूरी पृष्ठभूमि: मामला कहाँ से शुरू हुआ?
यह पूरा विवाद वडोदरा के तांदलजा (Tandalja) इलाके में स्थित 978 वर्ग मीटर के एक सरकारी भूखंड (VMC Plot) से जुड़ा है, जो यूसुफ पठान के बंगले के ठीक बगल में है।
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साल 2012: यूसुफ पठान ने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा का हवाला देते हुए वडोदरा नगर निगम (VMC) से इस जमीन को बाजार मूल्य पर उन्हें आवंटित करने का अनुरोध किया था।
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साल 2014: वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर राज्य सरकार के पास भेजा, लेकिन गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने इसे खारिज कर दिया कि बिना सार्वजनिक नीलामी के ऐसी सरकारी जमीन किसी को नहीं दी जा सकती।
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साल 2024: लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान के बहरामपुर (पश्चिम बंगाल) से सांसद चुने जाने के ठीक बाद, वडोदरा नगर निगम ने उन्हें नोटिस जारी कर इस जमीन से अतिक्रमण हटाने और बाड़ (Fencing) हटाने को कहा।
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अगस्त 2025 (सिंगल जज का आदेश): इसके खिलाफ पठान हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच के पास गए। जस्टिस मौना भट्ट की सिंगल बेंच ने उनकी याचिका खारिज करते हुए उन्हें ‘अतिक्रमणकारी’ (Encroacher) माना था और कहा था कि सेलिब्रिटी या सांसद होने के नाते समाज में उनकी जिम्मेदारी बड़ी है, वे कानून से ऊपर नहीं हैं।
मौजूदा सुनवाई इसी सिंगल जज के आदेश के खिलाफ की गई अपील पर चल रही है। अब कोर्ट ने मामले की अगली रूपरेखा तय करने और नीतिगत दावों को स्पष्ट करने के लिए पठान को 4 हफ्ते का समय दिया है, लेकिन तलवार अभी भी लटकी हुई है क्योंकि कोर्ट का रुख बिना भुगतान सरकारी जमीन का उपयोग करने को लेकर बेहद कड़ा है।
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