नई दिल्ली | मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
भारत ने एक बार फिर अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले) नीति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का परिचय देते हुए अफगानिस्तान को मानवीय सहायता की एक बड़ी खेप सौंपी है। भारत सरकार ने अफगान शिशुओं को जानलेवा बीमारी ट्यूबरकुलोसिस (TB) से बचाने के लिए 13 टन बीसीजी (BCG) वैक्सीन और उससे जुड़ी चिकित्सा सामग्री काबुल भेजी है।
📌 मुख्य आकर्षण: क्यों खास है यह मदद?
-
बच्चों के लिए सुरक्षा कवच: यह खेप विशेष रूप से नवजात शिशुओं को टीबी जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करेगी।
-
बड़ी मानवीय पहल: काबुल में अस्थिर स्वास्थ्य ढांचे के बीच भारत की यह सहायता लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनी है।
-
वैश्विक समन्वय: इस खेप का वितरण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के सहयोग से अफगान स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से किया जा रहा है।
-
संकट में साथ: हाल के महीनों में अफगानिस्तान में आई प्राकृतिक आपदाओं और संघर्षों के बीच भारत निरंतर दवाएं और खाद्य सामग्री भेज रहा है।
🏥 स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत का बढ़ता योगदान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने इस सहायता की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के स्वास्थ्य और भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। 13 टन की इस खेप में न केवल वैक्सीन है, बल्कि इसके प्रशासन के लिए आवश्यक सूखी सामग्री (Diluents और Syringes) भी शामिल है।
अफगानिस्तान में वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी का संक्रमण वहां के बच्चों में तेजी से फैल रहा है, जिसे रोकने में यह बीसीजी टीकाकरण अभियान निर्णायक साबित होगा।
📦 अब तक की कुल सहायता (एक नज़र में)
भारत ने केवल वैक्सीन ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान को जीवन रक्षक दवाओं का एक बड़ा जखीरा भेजा है:
| सहायता श्रेणी | विवरण |
| कुल चिकित्सा सहायता | 45 टन से अधिक (2026 तक) |
| विशेष दवाएं | कैंसर रोधी दवाएं, एंटी-टीबी ड्रग्स और आपातकालीन किट |
| हालिया मदद (मार्च 2026) | काबुल अस्पताल हमले के बाद 2.5 टन आपातकालीन चिकित्सा सामग्री |
| आपदा राहत (अप्रैल 2026) | बाढ़ प्रभावितों के लिए 3 टन मानवीय सहायता और कंबल |
🌍 कूटनीतिक और क्षेत्रीय महत्व
भारत का यह कदम स्पष्ट करता है कि राजनीतिक बदलावों के बावजूद भारत, अफगान नागरिकों के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्राथमिकता देता है।
“अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समय पर मिली सहायता देश के टीकाकरण कवरेज को बढ़ाने और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।”
भविष्य की योजनाएं
भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह आने वाले समय में अफगानिस्तान को तकनीकी चिकित्सा सहायता और ‘आयुष’ (Ayush) प्रणालियों के माध्यम से पारंपरिक उपचार में भी सहयोग करने पर विचार कर रहा है। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत का यह ‘सॉफ्ट पावर’ डिप्लोमेसी मॉडल वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है।
Matribhumisamachar


