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एप्स्टीन फाइल्स पर संसद में घमासान: हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया ‘बेबुनियाद’, जानें क्या है 1 ईमेल का सच?

राहुल गांधी संसद में एप्स्टीन फाइल्स का मुद्दा उठाते हुए

नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026. संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा हुआ जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘एप्स्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी पर गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों …

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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: वंदे मातरम् के लिए नए दिशा-निर्देश जारी, राष्ट्रगान जैसा मिलेगा सम्मान

गृह मंत्रालय भारत सरकार का प्रतीक चिन्ह

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार सुबह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर ऐतिहासिक नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब देश के सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस गीत …

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CTET फरवरी 2026 संपन्न: कब आएगी आंसर की और रिस्पांस शीट? जानें सटीक तारीख और प्रक्रिया

CTET लॉगिन पोर्टल के माध्यम से रिस्पांस शीट चेक करते उम्मीदवार

केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का आयोजन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा सफलतापूर्वक कर लिया गया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित हुई, जिसमें लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया। अब परीक्षा समाप्त होने के …

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राजनीति, सेवा और नेतृत्व की अमर विरासत को प्रदर्शित करते भारत के प्रमुख सिख नेता

– डॉ. अतुल मलिकराम भारतीय लोकतंत्र की नींव उसकी अद्भुत विविधता और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की भावना में निहित है। इसमें सिख समुदाय का योगदान अत्यंत गौरवशाली और प्रेरणादायक रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के आधुनिक भारत के निर्माण तक, सिख नेताओं ने राजनीति, प्रशासन, …

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गुप्त काल: क्यों कहलाता है भारतीय इतिहास का ‘स्वर्ण युग’? जानें 5 बड़े कारण

गुप्त कालीन सोने के सिक्के और मुद्राएँ।

भारतीय इतिहास में गुप्त काल को सर्वसम्मति से ‘स्वर्ण युग’ कहा जाता है। यह वह दौर था जब भारत ने कला, विज्ञान, साहित्य, अर्थव्यवस्था और प्रशासन—हर क्षेत्र में अभूतपूर्व ऊँचाइयाँ छुईं। चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय जैसे सक्षम शासकों के नेतृत्व में राजनीतिक एकता के साथ-साथ एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण …

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DRDO अप्रेंटिस भर्ती 2026: युवाओं के लिए सुनहरा मौका, आवेदन प्रक्रिया तेज

नई दिल्ली. रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने वर्ष 2026 के लिए अप्रेंटिस (Apprentice) भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया को तेज कर दिया है। अलग-अलग DRDO संस्थानों में ग्रेजुएट, डिप्लोमा और ITI अप्रेंटिस पदों पर भर्तियां …

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वराहमिहिर: खगोल विज्ञान और ज्योतिष के वो स्तंभ जिनके आगे आज भी विज्ञान नतमस्तक है

प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान के यंत्र और ग्रहों की गणना का चित्रण।

वराहमिहिर प्राचीन भारत की उन असाधारण विभूतियों में से एक थे, जिन्होंने गणित, ज्योतिष और खगोल विज्ञान (Astronomy) को रहस्य और अंधविश्वास से निकालकर तर्क, गणना और प्रेक्षण पर आधारित विज्ञान का स्वरूप दिया। वे गुप्तकाल की बौद्धिक समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं और आज उन्हें भारत के पहले …

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महर्षि भारद्वाज: क्या वाकई प्राचीन भारत में विकसित था विमानन विज्ञान? जानें ‘वैमानिक शास्त्र’ का सच

वैमानिक शास्त्र में वर्णित शकुन विमान का रेखाचित्र।

प्राचीन भारत की ज्ञान-परंपरा केवल दर्शन और अध्यात्म तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें विज्ञान, तकनीक और यांत्रिकी की भी गहरी समझ देखने को मिलती है। इन्हीं रहस्यमय और चर्चित विषयों में से एक है महर्षि भारद्वाज द्वारा रचित माने जाने वाला ग्रंथ ‘यंत्र सर्वस्व’, जिसका एक प्रमुख अंश ‘वैमानिक …

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देवेर का युद्ध: जब महाराणा प्रताप की तलवार ने घोड़े समेत दुश्मन के कर दिए थे दो टुकड़े

मेवाड़ के वीर महाराणा प्रताप का युद्ध क्षेत्र में पराक्रम दिखाते हुए रेखाचित्र।

देवेर का युद्ध (Battle of Dewair) भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और दीर्घकालिक संघर्ष की निर्णायक विजय का प्रतीक है। यह युद्ध अक्टूबर 1582 ईस्वी में महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की सेनाओं के बीच लड़ा गया। इतिहासकारों के अनुसार, यह युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि …

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मेवाड़ की छापामार युद्ध प्रणाली : भारतीय सैन्य रणनीति की कालजयी विरासत

महाराणा प्रताप अरावली की पहाड़ियों में छापामार युद्ध की रणनीति बनाते हुए

मेवाड़ की छापामार युद्ध प्रणाली (Guerrilla Warfare) भारतीय सैन्य इतिहास का वह गौरवशाली अध्याय है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि संख्या और संसाधनों से नहीं, बल्कि रणनीति, भूगोल और जनसमर्थन से युद्ध जीते जाते हैं। यह नीति केवल युद्ध कौशल नहीं थी, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वतंत्रता और स्वाभिमान …

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