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एप्स्टीन फाइल्स पर संसद में घमासान: हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया ‘बेबुनियाद’, जानें क्या है 1 ईमेल का सच?

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राहुल गांधी संसद में एप्स्टीन फाइल्स का मुद्दा उठाते हुए

नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026. संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा हुआ जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘एप्स्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी पर गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मोर्चा संभाला और राहुल गांधी के दावों को न केवल खारिज किया, बल्कि उन्हें “मानसिक स्थिरता की जांच” कराने तक की सलाह दे डाली।

राहुल गांधी के आरोप: क्या है पूरा विवाद?

राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) द्वारा जारी एप्स्टीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन फाइलों में नाम आने के बावजूद संबंधित लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार पर बाहरी दबाव है, जिसके कारण ऐसे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साधी जा रही है।

हरदीप सिंह पुरी का करारा जवाब: 5 बड़े स्पष्टीकरण

केंद्रीय मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सदन के भीतर राहुल गांधी के “तथ्यहीन” दावों की धज्जियां उड़ाईं। उनके जवाब के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. मुलाकातों का पेशेवर सच

पुरी ने स्वीकार किया कि वे दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एप्स्टीन से 3 से 4 बार मिले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मुलाकातें 2014 के आसपास हुई थीं, जब वे अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) में कार्यरत थे। यह मुलाकातें पूरी तरह से पेशेवर थीं और एक शांति प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं, जिसका नेतृत्व पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कर रहे थे।

2. ‘दोमुंहा’ (Two-faced) कहने के पीछे की कहानी

पुरी ने खुलासा किया कि एप्स्टीन ने उन्हें पत्राचार में ‘दोमुंहा’ कहा था। पुरी के अनुसार, “यह इस बात का प्रमाण है कि मैंने उसकी (एप्स्टीन की) संदिग्ध गतिविधियों में कोई रुचि नहीं दिखाई और न ही उसके किसी एजेंडे का हिस्सा बना।” उन्होंने राहुल गांधी को सुझाव दिया कि आधा-अधूरा पढ़ने के बजाय उन्हें पूरा ईमेल संदर्भ पढ़ना चाहिए।

3. ‘मेक इन इंडिया’ के लिए प्रयास

मंत्री ने बताया कि 2014 में, एक निजी नागरिक के रूप में, उन्होंने लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन को भारत में निवेश और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए ईमेल लिखा था। उस ईमेल की एक कॉपी एप्स्टीन को भी गई थी, क्योंकि वह उस समय कई बड़े बिजनेस नेटवर्क से जुड़ा था।

4. 30 लाख फाइलों में केवल 3 संदर्भ

पुरी ने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक की गई 30 लाख फाइलों में उनके नाम के केवल 3-4 संदर्भ हैं और केवल एक ईमेल साझा किया गया है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े डेटासेट में नाम का होना किसी अपराध का सबूत नहीं है।

5. ‘विदूषक तत्व’ और मानसिक स्थिरता पर तंज

राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए पुरी ने कहा, “सदन में चर्चा के दौरान राहुल गांधी जवाब सुनने के बजाय बाहर चले गए। उनके बयानों में ‘एलिमेंट्स ऑफ बफूनरी’ (विदूषक तत्व) हैं।”

सरकार की अगली कार्रवाई: विशेषाधिकार हनन का खतरा

ताजा जानकारी के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के इन आरोपों को सदन को गुमराह करने वाला बताया है। सरकार अब राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) लाने की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी को शाम 5 बजे तक अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने या माफी मांगने का समय दिया गया था।

‘एप्स्टीन फाइल्स’ का जिन्न भारतीय संसद में आने से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और नैतिकता का मुद्दा बना रहा है, वहीं सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करार दे रही है।

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