नई दिल्ली. भारत के कानूनी इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ गया है जिसने जीवन, मृत्यु और मानवीय गरिमा की परिभाषा को नए सिरे से लिखा है। सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा के मामले में ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (Passive Euthanasia) यानी निष्क्रिय इच्छा मृत्यु को पहली …
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