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मुंबई का आर्थर रोड जेल कनेक्शन और कुशीनगर में गिरफ्तारी: जानें कौन है ISIS एजेंट रिजवान अहमद?

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लखनऊ | 5 अप्रैल, 2026

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) ने एक बड़े संयुक्त ऑपरेशन में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के एक सक्रिय सदस्य रिजवान अहमद को कुशीनगर से गिरफ्तार किया है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि रिजवान न केवल आतंकी गतिविधियों में लिप्त था, बल्कि वह भारत में ISIS के लिए ‘रिक्रूटमेंट मॉड्यूल’ (भर्ती नेटवर्क) भी चला रहा था।

कुशीनगर में आधी रात को छापेमारी

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस टीम और यूपी एटीएस ने शनिवार रात कुशीनगर के पडरौना (छावनी क्षेत्र) में घेराबंदी कर रिजवान को दबोचा। यह गिरफ्तारी दिल्ली में दर्ज एक आतंकी मामले की जांच के दौरान मिले पुख्ता इनपुट्स के आधार पर की गई है। गिरफ्तारी के बाद उसे कुशीनगर की सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से पुलिस को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है। अब उसे विस्तृत पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है।

हैरान करने वाला पुराना रिकॉर्ड

जांच में सामने आया है कि 30 वर्षीय रिजवान अहमद का आतंकी इतिहास काफी पुराना है:

  • 2015 से जुड़ाव: वह वर्ष 2015 से ही ISIS की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन के संपर्क में था।

  • मुंबई और आर्थर रोड जेल: एक दशक पहले वह काम की तलाश में मुंबई गया था। 2016 में उसे मुंबई पुलिस ने आतंकी गतिविधियों और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह 2017 से 2023 तक जेल में बंद रहा।

  • भर्ती का मुख्य सूत्रधार: आरोप है कि उसने जेल जाने से पहले मुंबई से कई युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर विदेश भेजने में अहम भूमिका निभाई थी।

बरामदगी और रडार पर स्लीपर सेल

सुरक्षा एजेंसियों ने रिजवान के ठिकाने से कई आपत्तिजनक चीजें जब्त की हैं:

  • विस्फोटक सामग्री: बम बनाने में इस्तेमाल होने वाला संदिग्ध सामान।

  • डिजिटल साक्ष्य: लैपटॉप और मोबाइल फोन, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कॉल रिकॉर्ड्स और एन्क्रिप्टेड (Encrypted) मैसेजिंग ऐप्स के जरिए विदेशी हैंडलर्स से बातचीत के सबूत मिले हैं।

  • जेहादी साहित्य: युवाओं के ब्रेनवॉश के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज।

साजिश का दायरा: रेलवे और भीड़भाड़ वाले इलाके निशाने पर?

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में यूपी एटीएस ने पाकिस्तान समर्थित एक अन्य मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। एजेंसियों को संदेह है कि रिजवान अहमद ‘लोन वुल्फ’ हमले या किसी बड़े नेटवर्क के जरिए भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था।

अहम मोड़: जेल से छूटने के बाद रिजवान पडरौना में एक फास्ट फूड की दुकान चला रहा था ताकि वह सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सके और एक साधारण नागरिक की तरह ‘स्लीपर सेल’ के रूप में काम कर सके।

दिल्ली पुलिस अब रिजवान से इस बात की पूछताछ कर रही है कि पिछले एक साल में उसने कितने युवाओं को कट्टरपंथी बनाया है और उसके नेटवर्क में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे कुशीनगर जिले और नेपाल सीमा से सटे इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

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