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भारत का 1000 रुपए के नोट शुरू करने का कोई इरादा नहीं : आरबीआई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपडेट दिया था कि 30 सितंबर तक 2000 रुपये के 87 फीसदी नोट वापस आ गए थे, लेकिन अभी भी 10 हजार करोड़ रुपये के नोट बाजार में चल रहे हैं. आरबीआई के इस अपडेट के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या 1000 रुपये का नोट बाजार में वापस आ रहा है और क्या इसे दोबारा देखा जा सकता है? आरबीआई 1000 रुपये का नोट लाने के किसी भी तरह के प्लान में नहीं है और न ही 1000 रुपये का कोई नया नोट जारी करने के बारे में सोच रहा है. एएनआई ने एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि 1000 रुपये को फिर से लाने का आरबीआई का कोई प्लान नहीं है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने एक बयान में कहा था कि मार्केट में कैश फ्लो को बनाए रखने के लिए सरकार ने 500 रुपये के पर्याप्त नोट की छपाई की है, ताकि लोगों को कैश संबंधी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े. वहीं डिजिटल पेमेंट के उपयोग से लोगों के बीच कैश की आवश्यकता कम हुई है. ऐसे में आरबीआई का कहना है कि 1000 रुपये के नोट लाने की कोई जरूरत नहीं है. आरबीआई ने लोगों को अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी है.

2016 में हुई थी नोटबंदी 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2016 में नोटबंदी करके 1000 रुपये और पुराने 500 रुपये के नोट को बंद कर दिया था और उसकी जगह पर नए 500 रुपये के नोट और 2000 रुपये के नोट जारी किए थे. हालांकि अब सरकार ने 2000 रुपये के नोट को भी वापस ले लिया है. बैंकों में 2000 रुपये के नोट जमा करने और एक्सचेंज कराने की डेडलाइन समाप्त हो चुकी है.

यहां से अभी भी बदले जा सकते हैं 2000 रुपये के नोट 

हालांंकि अभी आप आरबीआई के कार्यालयों में 2000 रुपये के नोट को बदल और जमा करा सकते हैं. देश में आरबीआई के कुल 19 क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जहां से 2000 रुपये का बैंक नोट बदलवा सकते हैं.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।