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भाजपा ने बृजभूषण की जगह उनके पुत्र करण भूषण सिंह को दिया टिकट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी ने कैसरगंज लोकसभा सीट (kaiserganj Lok Sabha Seat) से गुरुवार को महिला पहलवानों से यौन शोषण के आरोपी बृजभूषण शरण का टिकट काट दिया। उनकी जगह उनके छोटे बेटे करण भूषण  सिंह (Karan Bhushan singh) को कैसरगंज से चुनावी मैदान में उतारा है। करण सिंह शुक्रवार को करण नामांकन करेंगे। बता दें कि कैसरगंज लोकसभा सीट में 3 मई नामांकन की आखिरी तारीख है।

कौन हैं करण सिंह?

करण सिंह बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के छोटे बेटे हैं। उनका जन्म 13 दिसंबर 1990 को हुआ। वह शादीशुदा हैं और उनके एक बेटा और एक बेटी है। वह डबल ट्रैप शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं। करण भूषण ने गोंडा में अपने पिता के नंदिनी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। ऑस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की। अभी वे उत्तर प्रदेश कुश्‍ती संघ के अध्यक्ष हैं। पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं। करण सिंह भारतीय कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष रहे, लेकिन पिता के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद करण सिंह ने भी पद छोड़ दिया था। बता दें कि महिला पहलवानों की ओर से भाजपा नेता बृजभूषण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए गए। इसके बीच उत्तर प्रदेश में कुश्ती संघ का चुनाव हुआ था। 12 फरवरी को हुए इस चुनाव में करण को सर्वसम्मति से यूपी कुश्ती संघ का अध्यक्ष चुना गया था।

क्‍यों कटा छह बार के सांसद बृजभूषण का टिकट?

भाजपा नेता और छह बार सांसद रहे बृजभूषण पर महिला पहलवानों ने दुष्‍कर्म के आरोप लगाए। दुष्‍कर्म के आरोपों की दोबारा जांच कराने के लिए एक याचिका लगाई गई, जिसे कोर्ट ने 26 अप्रैल को खारिज कर दिया। अब अदालत 7 मई को बृजभूषण पर आरोप तय करेगी। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने जून 2023 को बृजभूषण के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इधर 7 मई को ही देश में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान होना है। ऐसे में भाजपा को डर है कि विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता है। इसलिए बृजभूषण का टिकट काटकर उनके बेटे को टिकट दिया गया।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।