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झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और जेडीयू के बीच हुआ गठबंधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रांची. झारखंड में इस बार बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है. इसके लिए जेडीयू, आजसू और एलजेपी-रामविलास के साथ बैठक की जाएगी. असम के सीएम और झारखंड बीजेपी के चुनाव सह-प्रभारी हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने बताया कि जेडीयू, आजसू से हम लोग अपना विचार-विमर्श पूरा करेंगे. एलजेपी-रामविलास से चर्चा आलाकमान करेगा. वह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है. झारखंड में BJP चुनाव समिति की बैठक के बाद चुनाव सह प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि जेडीयू और आजसू के साथ झारखंड के स्तर पर ही हम पहले चरण का बातचीत की जाएगी. बता दें झारखंड में एनडीए में गठबंधन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन बीजेपी आजसू और जेडीयू के बीच विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन होने के आसार हैं.

बीजेपी-जेडीयू गठबंधन पर लंबे समय से चर्चा

झारखंड में BJP और जेडीयू के बीच काफी समय से बातचीत हो रही है. अभी कोई फाइनल रिजल्ट नहीं आया है. वहीं झारखंड से निर्दलीय विधायक सरयू राय झारखंड में जेडीयू में शामिल हो गए हैं. सरयू राय ने जमशेदपुर ईस्ट सीट पर दावा किया था और कहा था, ”मैं जेडीयू से चुनाव लड़ूंगा. BJP से गठबंधन की बात चल रही है. सीटें मायने नहीं रखती. जिताऊ उम्मीदवार होने चाहिए. इसकी कोशिश हो रही है.”

2019 में आजसू के बिना बीजेपी ने लड़ा था चुनाव

झारखंड में आजसू बीजेपी की पुरानी सहयोगी है और 2024 लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन हुआ था. गिरडीह सीट आजसू जीती थी. झारखंड में 2019 में BJP और आजसू का गठबंधन टूट गया था. विधानसभा चुनाव में गठबंधन नहीं हो पाया था. कुछ सीटों को लेकर पेंच फंस गया था. आजसू 45 से ज्यादा सीटों पर अकेले लड़ी थी. इस कारण चुनाव में BJP को हार का सामना करना पड़ा था. वह सत्ता से बाहर हो गई थी. 2009 और  2014 में बीजेपी आजसू मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ी थी. वहीं, चिराग की पार्टी एलजेपी-रामविलास एनडीए में 28 सीट चाहती है. 25 अगस्त को रांची में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह बात पार्टी की ओर से की गई थी. लेकिन इतनी सीटें मिलना असंभव है क्योंकि झारखंड में 82 सीट है.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।