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ईद पर पाकिस्तान की सड़कों पर उतरे लाखों भिखारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान में ईद की मौके पर जहां बाजार गुलजार हैं तो वहीं कराची शहर एक अलग ही तरफ ही मुसीबत में घिरा हुआ नजर आ रहा है। ईद के मौके पर कराची में भिखारियों का हुजूह उमड़ पड़ा है। लाखों की संख्या में ये भिखारी शहर के व्यस्त बाजारों, मुख्य सड़कों, ट्रैफिक सिग्नल, शॉपिंग मॉल और मस्जिदों के बाहर हर तरफ नजर आ रहे हैं। फिलहाल, कराची में मौजूद भिखारियों की संख्या चार लाख से भी अधिक बताई जा रही है।

चिंताजनक हैं हालात 

कराची के एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल इमराम याकूब मिन्हास ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि चिंताजनक हालात हैं। कराची में चार लाख से अधिक संख्या में पेशेवर भिखारियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। एआईजी मिन्हास के मुताबिक कराची पेशेवर भिखारियों और अपराधियों के लिए एक प्राइम स्पॉट बन गया है। उन्होंने कहा कि कराची में सिंध के अंदरूनी हिस्सों, बलूचिस्तान और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से भारी संख्या में लोग भीख मांगने पहुंचे हैं। याकूब मिन्हास ने कहा कि कराची में अपराध चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए अतिरिक्त कैमरे लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचा जा सके।

क्या कहते हैं आंकड़े 

कराची पुलिस के आधिकारिक आंकड़े से पता चलता है कि इस साल अब तक शहर की सड़कों पर 16,000 से अधिक अपराधों को अंजाम दिया जा चुका है। लूट का विरोध करने पर अपराधी हत्या कर देते हैं। मार्च में ऐसे अपराधियों ने 16 लोगों की हत्या कर दी थी जबकि इस साल 50 से ज्यादा लोगों का कत्ल किया जा चुका है। रमजान के दौरान ही सड़कों पर होने वाले अपराधों में 19 नागरिकों को निशाना बनाया गया था। सिंध उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अकील अहमद अब्बासी ने हाल ही में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कराची में सड़कों पर होने वाले अपराध पर अंकुश लगाने और प्रांत के अन्य हिस्सों में सुरक्षा में सुधार करने के लिए अपराधियों, उनके आकाओं और मददगारों पर कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।