शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 05:15:22 AM

भाजपा में शामिल हो सकते हैं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रांची. झारखंड (Jharkhand) में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होंने वाले हैं. इससे पहले सभी दलों की तरफ से चुनावी बिसात बिछाए जा रहे हैं. इधर राज्य की राजनीति में इस बात की काफी चर्चा है कि क्या जेएमएम के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन बीजेपी का दामन थाम लेंगे. इस मुद्दे पर हालांकि चंपई सोरेन की तरफ से अब तक कोई संकेत नहीं दिए गए हैं.

बताया जा रहा है कि चंपई सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नाराज चल रहे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यह भी खबर है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा से उनकी दो दौर की बातचीत भी हो गई है. जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात होने की चर्चा बताई जा रही है. गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की खबर का झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के बहरगोड़ा विधायक समीर मोहंती ने खारिज किया है और इसे भाजपा की अफवाह और साजिश बताया है.

बीजेपी की तरफ से चंपई की हो रही है तारीफ

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा, चंपई सोरेन एक अच्छे मुख्यमंत्री के तौर पर झारखंड की सेवा कर रहे थे. शामिल होने के मुद्दे पर उन्होेंने कहा कि सब कुछ केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर करता है. वह एक बहुत बड़ी शख्सियत हैं. झारखंड के 3.5 करोड़ लोग उनके काम से खुश थे. लेकिन जिस तरह से उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, वह दुर्भाग्यपूर्ण था. यह एक झटका था कि एक अच्छे व्यक्ति को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया गया.

चंपई अगर करेंगे विद्रोह तो जेएमएम को लगेगा झटका

चंपई सोरेन झारखंड के कोल्हान इलाके से आते हैं और उन्हें झारखंड में कोल्हान टाइगर के नाम से भी जाना जाता है. कोल्हान में विधानसभा की 14 और लोकसभा की 2 सीटें आती हैं. यदि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन BJP मे शामिल होते हैं तो विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड में सत्तारूढ़ जेएमएम को बड़ा झटका लग सकता है.

- Advertisement -

एनडीटीवी

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।