शनिवार, सितंबर 19 2026 | 10:34:21 AM

संभल में 46 साल बाद खुले मंदिर में भंडारे के लिए उमड़ी भक्तों की भारी भीड़

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. संभल के थाना नखासा क्षेत्र के मौहल्ला खग्गू सराय में स्थित प्राचीन श्री कार्तिकेश्वर महादेव मंदिर के कपाट 46 साल बाद शनिवार रात खोले गए। भगवान हनुमान जी को चोला चढ़ाया गया और आरती के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया। भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालु झूमते नजर आए।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस और पीएसी बल तैनात रहा। मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया और भंडारा शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।

राजेश सिंघल का बयान

भाजपा पश्चिम के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने कहा कि, 46 साल बाद भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर के ताले खुले हैं। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती हुई। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ लिया। उन्होंने संभल को एक धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी बताते हुए कहा कि, यहां 68 तीर्थ और 19 कूप हैं, जो इसे तीर्थ नगरी का दर्जा देते हैं।

संभल की परिक्रमा का महत्व

सिंघल ने कहा कि, संभल की 24 कोसी परिक्रमा का महत्व अयोध्या और वृंदावन की परिक्रमा के बराबर है। दीपावली के बाद आयोजित परिक्रमा में इस वर्ष तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि जिस मंदिर के ताले 46 वर्षों बाद खुले हैं, वह 68 तीर्थों में से एक है।

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श्रद्धालुओं में उत्साह

ताले खुलने की खुशी में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह आयोजन क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और बड़ी संख्या में लोग मंदिर के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।