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गुजरात में राशन की करीब 17 हजार दुकानें बंद, प्रधानमंत्री के भाई प्रह्लाद मोदी ने किया समर्थन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गांधीनगर. गुजरात में सस्ते अनाज के राशन दुकानदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अखिल गुजरात उचित मूल्य दुकान संघ ने यह फैसला लिया है। आज से पूरे राज्य में सस्ता अनाज वितरण प्रक्रिया बंद रहेगी। सरकारी अनाज मात्रा चालान भरने की प्रक्रिया बंद रहेगी।

राज्य के 17 हजार से ज्यादा डीलर आंदोलन में शामिल होंगे और वितरण व्यवस्था से अलग रहेंगे। पीएम मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी ने दुकानदारों से हुंकार भरी कि आंदोलन जारी है, डटे रहो। राजकोट में 700 व्यापारियों की हड़ताल के कारण 3 लाख कार्डधारकों को राशन नहीं मिलेगा।

सूरत शहर में लगभग 1100 सरकारी अनाज की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। मेहसाणा जिले के 670 से ज्यादा डीलर हड़ताल में शामिल हुए हैं। भावनगर शहर और जिले के 750 से ज़्यादा राशन दुकानदार हड़ताल पर चले गए हैं। अहमदाबाद और वडोदरा में भी कई जगहों पर राशन की दुकानें बंद हैं।

प्रह्लाद मोदी की हुंकार, आंदोलन जारी है, डटे रहो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छोटे भाई और अखिल गुजरात उचित मूल्य दुकान संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद मोदी ने कहा कि दुकानदारों का आंदोलन अभी भी जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और कुछ व्यापारी इसे तोड़ने के लिए आंदोलन खत्म होने की झूठी खबर फैला रहे हैं।

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प्रह्लाद मोदी ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने सचिव को सूचित कर दिया है कि दुकानदार अतिरिक्त गतिविधियां करने के लिए बाध्य नहीं हैं, जिसके संबंध में उन्होंने उच्च न्यायालय में एक मुकदमा भी जीता है। उन्होंने सभी दुकानदारों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों से गुमराह न हों और आंदोलन में डटे रहें।

समस्या के शीघ्र समाधान की मांग

राशन दुकानदार सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह इस समस्या पर जल्द से जल्द निर्णय लेकर इसका समाधान करे, ताकि न तो दुकानदार को और न ही कार्डधारक को किसी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़े।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।