राजपीपला । बुधवार, 24 जून 2026
गुजरात की राजनीति और आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए मंगलवार का दिन एक बहुत बड़ा झटका साबित हुआ। नर्मदा जिले की राजपीपला जिला एवं सत्र अदालत ने डेडियापाड़ा विधानसभा सीट से ‘आप’ के चर्चित विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और सात अन्य साथियों को वनकर्मियों पर हमला करने तथा जबरन वसूली (Extortion) के मामले में दोषी पाते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए.वी. हीरापरा ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी 9 दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट के इस फैसले के चंद घंटों के भीतर ही चैतर वसावा की विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई है।
क्या है पूरा मामला? (Why was Chaitar Vasava Convicted?)
यह पूरा विवाद 30 अक्टूबर 2023 की रात से शुरू हुआ था। अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार, नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा इलाके में वन विभाग के अधिकारियों ने सरकारी वन भूमि पर अवैध रूप से उगाई गई कपास की फसल को हटा दिया था और एक वन अपराध दर्ज किया था।
इसके बाद, इस मुद्दे पर बातचीत करने के बहाने अधिकारियों को विधायक चैतर वसावा के आवास पर बुलाया गया। आरोप के मुताबिक, विधायक के घर पर अधिकारियों के साथ गाली-गलौज की गई, एक फॉरेस्टर को थप्पड़ मारा गया और उन पर दबाव बनाने के लिए चैतर वसावा ने अपनी पिस्तौल से हवा में गोली चलाई।
इतना ही नहीं, अगले दिन (31 अक्टूबर 2023) विधायक के सहयोगियों और उनकी पत्नी ने फसल हटाने के मुआवजे के रूप में वन अधिकारियों से 60,000 रुपये की जबरन वसूली की। इस मामले में पुलिस ने 2 नवंबर 2023 को डेडियापाड़ा थाने में दंगा करने, जबरन वसूली, सरकारी कर्मचारी पर हमला और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
कोर्ट में कैसे साबित हुआ दोष?
विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) अमित नायर और सरकारी वकील वंदना भट्ट ने अदालत के सामने मजबूत सबूत पेश किए। मुकदमे के दौरान:
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कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
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कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR) और बैंक लेन-देन के दस्तावेजी सबूत पेश किए गए, जिससे आरोपियों के बीच संबंध और जबरन वसूली की रकम की पुष्टि हुई।
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अभियोजन पक्ष ने विधायक के लिए अधिकतम 10 साल की सजा मांगी थी, क्योंकि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उनसे कानून हाथ में न लेने की उम्मीद की जाती है।
बचाव पक्ष ने गवाहों को दोबारा बुलाने और अतिरिक्त गवाह पेश करने के लिए गुजरात हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन ऊपरी अदालतों ने इसे ‘मुकदमे में देरी करने की कोशिश’ बताते हुए याचिका खारिज कर दी थी।
तत्काल प्रभाव से रद्द हुई विधानसभा सदस्यता
इस फैसले के बाद चैतर वसावा अब विधायक नहीं रहे हैं। ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act, 1951) के कड़े प्र प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी मौजूदा सांसद या विधायक को किसी भी आपराधिक मामले में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द हो जाती है।
गुजरात विधानसभा सचिवालय द्वारा इस संबंध में औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर सीट को खाली घोषित कर दिया जाएगा। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक चैतर वसावा को किसी ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) से अपनी सजा पर ‘स्टे’ (Stay) नहीं मिल जाता, तब तक उनकी यह अयोग्यता बरकरार रहेगी और वे आने वाले समय में चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।
जेल में नवजात और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष अर्जी
दोषी ठहराए जाने के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है। वकीलों के अनुसार, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए आरोपियों ने नर्मदा जिला जेल के बजाय किसी अन्य जिले की जेल (जैसे वडोदरा सेंट्रल जेल) में स्थानांतरित करने की गुहार लगाई है।
इसके अतिरिक्त, इस मामले में कुल 4 महिलाएं दोषी पाई गई हैं, जिनमें से एक महिला गर्भवती है और दूसरी एक नवजात शिशु की मां है। उनके वकीलों ने अदालत से मानवीय आधार पर बच्चे को जेल में मां के साथ रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। दूसरी ओर, चैतर वसावा ने कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे इस फैसले के खिलाफ जल्द ही गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे।
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