रविवार, सितंबर 20 2026 | 12:38:12 AM

सम्राट चौधरी ने पेश किया बिहार का 3 लाख 16 हजार 895 करोड़ रुपए का बजट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. बिहार के उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश किया. बिहार का बजट का इस बार 3 लाख 16 हजार 895 करोड़ रुपए है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के बजट से करीब 38,169 करोड़ रुपए ज्यादा है. इस बजट में कई अहम घोषणाएं की गई है. बजट पेश होने के बाद हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है. यहां तक की खुद सीएम नीतीश कुमार ने भी सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाई. वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बजट को लेकर एनडीए सरकार पर निशाना साधा है.

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार सरकार ने आज बजट का सरकारी पन्नों पर झूठ और जुमलों की स्याही से लिखा भाषण पढ़ा है. जमीनी सच्चाई यह है कि बिहार आधुनिक सुविधाएं तो छोड़िए अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है. सरकार राजस्व सृजन कर नहीं पा रही है लेकिन बजट को बढ़ा दे रही है. इन्हें कुर्सी और सरकार बचाने की चिंता है लेकिन हमें बिहार बचाने और बनाने की चिंता है. तेजस्वी यादव ने कहा कि ये बजट इन लोगों का आखिरी बजट है, हमने कल 200 यूनिट बिजली फ्री करने की मांग की थी. हमारी मांग थी कि गैस का दाम कम हो, वृद्धा पेंशन बढ़ाया जाए,लेकिन इस बजट में कोई ध्यान नहीं दिया गया.

उन्होंने आगे कहा कि प्रति व्यक्ति आय बिहार सबसे पीछे है. गरीबी और बेरोजगारी बिहार में ज्यादा है. कही फैक्ट्री लगाने की बात ये लोग नहीं करेंगे. युवाओं को नौकरी कैसे देंगे इसकी बात नहीं की गई. पेपर लीक कैसे रोकेंगे इस पर कोई बात नहीं, पुलिसकर्मियों को मारा जा रहा है इस पर कोई ध्यान नहीं है. पलायन को कैसे रोकेंगे इस पर कोई चर्चा नहीं, दिव्यांग भाई के बारे में कोई चर्चा नहीं,महिलाओं के लिए कोई चर्चा नहीं की गई. तेजस्वी ने कहा महंगाई से सब परेशान है, लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं की गई. बिहार कैसे आगे बढ़े इस पर सत्ता पक्ष को कोई चिंता नहीं है, कल सदन में डिटेल में भाषण होगा, हम कल पोल खोलेंगे. भारत सरकार ने गुजरात को क्या क्या दिया और बिहार को क्या क्या दिया ये बताना चाहिए था. सरकार से जनता मायूस पहले से थी, इस बजट में बाद सरकार से लोगों का विश्वास उठ गया है.

साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।