नई दिल्ली. बिहार में हुए SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अब देश के 9 राज्यों व 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत हो रही है। 28 अक्तूबर को इन सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता सूचियां फ्रीज कर दी गईं। अब आज से SIR की प्रक्रिया का दूसरा चरण शुरू हो रहा है, जो कि 7 फरवरी 2026 तक चलेगा। जिन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों यह प्रक्रिया हो रही है उनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप शामिल हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है?
यह एक खास अभियान है जिसके तहत किसी निर्वाचन क्षेत्र या राज्य की मतदाता सूची को वेरिफाई, सही और अपडेट किया जाता है। इसमें काफी गहन जांच होती है घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाता है। इससे चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि हर योग्य मतदाता सही तरीके से मतदाता सूची में शामिल हो और कोई भी नकली या डुप्लीकेट नाम इसमें न रहे।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (“RPA 1950”) संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग को देता है। चुनावी मशीनरी, पात्रता शर्तें, मतदाता सूची तैयार करने का तरीका और प्रक्रिया RPA 1950 और RPA 1950 के तहत बनाए गए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 (“RER, 1960”) के तहत प्रदान की गई हैं। RPA 1950 के सेक्शन 21 के साथ-साथ RPA 1950 के दूसरे लागू प्रोविज़न्स के तहत, कमीशन को इलेक्टोरल रोल्स का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण करने का अधिकार है, जिसमें नए सिरे से मतदाता सूची तैयार करना भी शामिल है।
ये तो अभी बिहार में हुआ था, इस बार क्या नया है?
बीएलओ मतदाताओं के पास कब आएंगे और इस दौरान क्या करना होगा?
एसआईआर सामान्य मतदाता सूची संशोधन से अधिक विस्तृत प्रक्रिया है। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत निर्वाचन अधिकारी और सहायक निर्वाचन अधिकारी 27 अक्तूबर 2025 को फ्रीज की गई मतदाता सूची के अनुसार प्रत्येक मतदाता के लिए यूनिक एन्यूमरेशन फॉर्म तैयार करेंगे। इन फॉर्म में मौजूदा मतदाता सूची से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी होगी। हर 1000 मतदाता पर एक बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ नियुक्त किया जाएगा। ये बीएलओ इन फॉर्मों को अपने क्षेत्र के मतदाता तक पहुंचाएंगे और उन्हें 2002-2004 में हुई पिछली एसआईआर के रिकॉर्ड से नाम या रिश्तेदारों के नाम से मिलान करने में मदद करेंगे। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों को ऑल-इंडिया डेटाबेस तक भी पहुंच दी जाएगी। जिससे अगर मतदाता का नाम 2002-2004 में किसी अलग मतदान केंद्र, विधानसभा या राज्य में रहा हो तो उसका मिलान किया जा सके। नाम मिलान के साथ ही मतदाता का काम पूरा हो जाएगा। आगे की प्रक्रिया निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ द्वारा की जाएगी।
बीएलओ जब मतदाता के घर आएगा उस वक्त मतदाता घर पर नहीं हुआ तो क्या उसका नाम सूची से कट जाएगा?
बीएलओ मतदाता के पास जाकर क्या करेंगे?
जिन्हें दस्तावेज दिखाने की जरूरत पड़ेगी, उन्हें कौन से दस्तावेज रखने होंगे?
जिन मतदातों के नाम का मिलान नहीं हो पाता उन्हें इसके लिए कुछ तय दस्तावेज दिखाकर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाना होगा। इनमें निम्न दस्तावेज शामिल हैं…
- केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी सरकारी उपक्रम के नियमित कर्मचारी या पेंशनधारक को जारी किया गया पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश।
- किसी सरकारी संस्था, स्थानीय निकाय, बैंक, डाकघर, एलआईसी या सरकारी उपक्रम द्वारा एक जुलाई 1987 से पहले जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र, प्रमाणपत्र या दस्तावेज।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाणपत्र।
- पासपोर्ट।
- किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया मैट्रिकुलेशन या शैक्षिक प्रमाणपत्र।
- राज्य सरकार की सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र।
- वन अधिकार प्रमाणपत्र।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी, एससी, एसटी या किसी जाति का प्रमाणपत्र।
- राष्ट्रीय नागरिक पंजी जहां लागू हो।
- परिवार रजिस्टर, जिसे राज्य या स्थानीय निकायों द्वारा तैयार किया गया हो।
- सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र।
- आधार कार्ड मान्य पर आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार, पत्र संख्या 23/2025-ERS/Vol.II दिनांक 09.09.2025 के अनुसार लागू होंगे।
कौन दर्ज करवा सकता है नाम?
अगर मैं ऑनलाइन फॉर्म भरना चाहूं तो क्या?
2004 में हुआ था आखिरी एसआईआर
यह विशेष पुनरीक्षण 20 साल बाद हो रहा है। इससे पहले 1951 से 2004 के बीच कुल आठ बार एसआईआर की प्रक्रिया की गई थी। अब इस अभ्यास के तहत सभी योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाएगा और उन नामों को हटाया जाएगा जो गलत तरीके से दर्ज हैं। इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं और कोई अयोग्य नाम सूची में शामिल न रहे।
साभार : अमर उजाला
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