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कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से की वक्फ संशोधन कानून पर जल्द सुनवाई की मांग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. वक्फ संशोधन बिल 2025 को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मंजूरी दे दी, लेकिन अब तक इसका विरोध नहीं थमा है. वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अब तक 6 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिन पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है. सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है, जिस पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने भी सुनवाई का आश्वासन दिया है.

एडवोकेट कपिल सिब्बल याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से कोर्ट में पेश हुए थे. उन्होंने कहा, ‘हम वक्फ कानून में किए गए संशोधनों का विरोध करते हैं और जल्द सुनवाई की मांग करते हैं.’ चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि जल्द सुनवाई के अनुरोध को लेकर पहले ही व्यवस्था बनी हुई है. आपको यहां इसे रखने की कोई जरूरत नहीं थी. सीजेआई ने कहा, ‘मैं दोपहर को इन अनुरोधों को देखूंगा और मामले की सुनवाई पर फैसला लूंगा.’ उन्होंने सुनवाई का आश्वासन दिया है. वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अबतक सुप्रीम कोर्ट में 6 याचिकाएं दायर हुई हैं. याचिकाकर्ता आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से जल्दी सुनवाई की मांग कर सकते हैं.

अन्य याचिकाकर्ताओं के लिए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और निजाम पाशा भी पेश हुए थे. कानून के खिलाफ सबसे पहले  कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने 4 अप्रैल को याचिका दाखिल की थी. उनके अलावा एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून के संशोधनों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. एक गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ ने भी याचिका दायर की है. केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों के धार्मिक संगठन ‘समस्त केरल जमीयत-उल उलेमा’ ने एडवोकेट जुल्फिकार अली पी एस के माध्यम से याचिका दाखिल की.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।