नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘वंदे मातरम’ के साथ जो अन्याय हुआ, वह कोई मामूली घटना नहीं थी. यह कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति की शुरुआत थी, जिसकी वजह से अंततः देश का विभाजन हुआ. संसद में चल रही चर्चा के दौरान सिंह ने कहा कि हमें यह कड़वा सच स्वीकार करना होगा कि वंदे मातरम को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार था. उन्होंने इतिहास को कुरेदते हुए कहा कि जिस बंगाल की धरती पर इस गीत की रचना हुई, वहीं कांग्रेस ने इसे ‘खंडित’ करने का काम किया. रक्षा मंत्री ने मांग की है कि राष्ट्रगीत को उसका खोया हुआ गौरव वापस मिलना चाहिए. उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति और पलायन पर भी गहरी चिंता जताई.
तुष्टीकरण से हुआ देश का बंटवारा:
राजनाथ सिंह ने कहा कि आजाद भारत में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को बराबर दर्जा मिलना चाहिए था. लेकिन वंदे मातरम को जानबूझकर खंडित किया गया. यह अन्याय एक सोची-समझी राजनीति का हिस्सा था. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण का रास्ता अपनाया. इसी रास्ते ने आगे चलकर भारत के टुकड़े करवा दिए. सिंह का मानना है कि वंदे मातरम अपने आप में पूर्ण है. लेकिन इसे अधूरा बनाने की कोशिश की गई थी. अब समय आ गया है कि इस गलती को सुधारा जाए.
संविधान में मिले बराबरी का सम्मान:
रक्षा मंत्री ने सदन में एक बड़ा सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर इस पर विचार करना चाहिए. क्या संविधान में नया दायित्व नहीं जोड़ा जा सकता? राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रगान जैसा सम्मान मिलना चाहिए. राजनाथ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ नहीं था. बंकिमचंद्र चटर्जी की किताब ‘आनंद मठ’ भी किसी धर्म के विरोधी नहीं थी. इसे गलत तरीके से पेश किया गया था. यह नैतिकता का तकाजा है कि इसका गौरव लौटाया जाए.
बंगाल में घुसपैठ और पलायन:
अपने भाषण के अंत में उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति पर भी बात की. उन्होंने दावा किया कि आज बंगाल से कई परिवारों को पलायन करना पड़ रहा है. इसके लिए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया. राजनाथ ने कहा कि यह टीएमसी की विभाजनकारी राजनीति का नतीजा है. घुसपैठियों को शरण देने की वजह से वहां के मूल निवासियों पर संकट आ गया है. यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है.
साभार : न्यूज18
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