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शाह-डोभाल-जयशंकर ने बैठक कर की तहव्वुर राणा के भारत आने की तैयारियों की समीक्षा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. 26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के भारत आने से पहले सियासी गलियारों में हलचल मच गई है. इसे लेकर के NSA प्रमुख अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की. मुलाकात के बाद बैठक हुई जिसमें कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. बता दें कि NIA आज देर रात या कल सुबह एक विशेष विमान से 26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण कर दिल्ली आ जाएगी.

मुख्यालय लाया जाएगा तहव्वुर राणा

सबसे पहले राणा को NIA मुख्यालय ले जाया जाएगा, जिसके बाद उसे NIA की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा (ये पेशी फिजिकली होगी या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी ये अभी साफ नहीं है). ये पेशी NIA द्वारा दर्ज आपराधिक साजिश रचने और देश द्रोह के मामले में होगी, जिसमे NIA तहव्वुर राणा की ज्यादा से ज्यादा दिन की रिमांड लेगी.

ले जाएगी मुंबई

NIA की रिमांड खत्म होने पर तहवूर राणा को न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा जाएगा तो मुंबई पुलिस 26/11 पर हुए आतंकी हमले के केस में तहव्वुर राणा को को अपने साथ मुंबई ले जाएगी. वहां की कोर्ट में पेश कर राणा को अपनी कस्टडी में ले लेगी. जिसके बाद ये तय होगा कि तहव्वुर राणा को मुंबई की जेल में रखना है या तिहाड़ जेल में.

लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य

कनाडाई-पाकिस्तानी नागरिक तहव्वुर राणा लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य है. उसने अपने साथी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली (जिसे दाऊद गिलानी के नाम से भी जाना जाता है) के लिए पासपोर्ट की व्यवस्था की थी ताकि वह भारत दाखिल होकर मुंबई हमलों के लिए टार्गेट्स के चुन सके. ये हमला लश्कर और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की मिलीभगत से हुआ था. राणा ने मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुई मौतों पर खुशी जताई थी और कहा था कि इस हमले में शामिल आतंकियों को पाकिस्तान का सबसे बड़ा मरणोपरांत सैन्य सम्मान दिया जाना चाहिए.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।