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बीएलए ने बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा पर किया कब्जा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

क्वेटा. भारत के साथ उलझते ही पाकिस्तानी सेना के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में पाकिस्तानी सेना की कई पोस्ट पर कब्जा कर लिया है। बीएलए ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। शहर के कई हिस्सों पर पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण खो दिया है। बीएलए ने गैस पाइपलाइन को उड़ाने का दावा किया है।

पाकिस्तानी सेना की बढ़ी चुनौती

फ्रंटियर कॉर्प्स के मुख्यालय समेत प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों के पास विस्फोट और गोलीबारी की खबरें आई हैं। बीएलए के हमले ने पाकिस्तान के लिए कई मोर्चों पर चुनौती को बढ़ा दिया है। खैबर-पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार हमला जारी रखा है। पिछले कुछ दिनों में टीटीपी के हमलों में कई पाकिस्तानी जवान मारे गए हैं। इसके साथ ही भारतीय बलों ने भी पाकिस्तान के आतंकी अड्डों पर हमला किया था।

भारत और पाकिस्तान में तनाव

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर हमले की खबर ऐसे समय आई है, जब बृहस्पतिवार की रात को पाकिस्तान ने भारत के जम्मू, पठानकोट, ऊधमपुर समेत कई शहरों में सैन्य अड्डों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश की। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हमले को नाकाम करते हुए जवाबी कार्रवाई करते हुए लाहौर, इस्लामाबाद, रावलपिंडी समेत कई पाकिस्तानी शहरों पर हमला किया।

बीएलए ने तेज किए हमले

एक दिन पहले ही बीएलए ने पाकिस्तानी सेना के काफिले पर बोलन के इलाके में बड़ा हमला किया था। इस हमले में गश्ती कर रहे पाकिस्तानी सेना के दल को निशाना बनाया गया था। बीएलए के स्पेशल ऑपरेशन दस्ते ने रिमोट कंट्रोल आईईडी विस्फोट के जरिए सेना के वाहन को उड़ा दिया था। इस हमले में 12 पाकिस्तानी जवान मारे गए थे। बीएलए से जुड़े मीडिया ग्रुप हक्काल ने हमले का वीडियो भी जारी किया था।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।