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महाराष्ट्र में अवैध चर्चों पर चलेगा बुलडोजर, आएगा धर्मांतरण विरोधी कानून

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. महाराष्ट्र में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई बीजेपी अब धर्मांतरण के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाएगी। बीजेपी महाराष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखकर बावनकुले ने बुधवार को विधानसभा में बड़ा ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में धर्मांतरण रोकने के लिए राज्य सरकार सख्त कानून बनाएगी। विधानसभा के विधायकों की चिंताओं पर ऐसा आश्वासन राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिया। बुधवार को विधायक अनुपभैया अग्रवाल, अतुल भातखलकर सहित अन्य विधायकों ने राज्य में धर्मांतरण रोकने से संबंधित प्रश्न पूछा। उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि राज्य में धर्मांतरण रोकने के लिए एक कड़ा कानून बनाया जाएगा।

अवैध चर्च पर चलेगा बुलडोजर

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि वह इस बारे में वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे। बावनकुले ने कहा कि कड़े प्रावधानों के साथ धर्मांतरण-रोधी कानून कैसे लाया जाए। उन्होंने सदन में कहा कि धुले-नंदुरबार के संभागीय आयुक्त को क्षेत्र में अनधिकृत गिरजाघरों की जांच करने और उन्हें छह महीने में ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। इस पर बीजेपी के विधायक अतुल भातखलकर ने पूछा कि जब पहले से ही पता है कि गैरकानूनी है तो छह महीने का समय क्यों दिया जा रहा है ? तत्काल अनधिकृत धार्मिक ढांचों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

आदिवासी बेल्ट में धर्मांतरण

इस पर चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कार्रवाई करने से पहले शिकायतों की जांच आवश्यक है। बीजेपी के ही विधायक संजय कुटे ने कहा कि धर्मांतरण केवल नंदुरबार में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के आदिवासी इलाकों में हो रहा है। अग्रवाल ने दावा किया कि नवापुर (धुले जिला) में आदिवासियों और गैर-आदिवासियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच दिया जा रहा है। गौरतलब हो कि महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य गुजरात ने दिवंगत सीएम विजय रुपाणी के कार्यकाल में धर्मांतरण रोधी कानून बनाया था। जिसके कुछ प्रावधानों पर अदालत ने रोक लगा दी थी। देश के कई अन्य राज्यों ने भी धर्मांतरण रोधी कानून बनाए हुए हैं।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।