इस्लामाबाद. पाकिस्तान, साउथ एशिया की जियोपॉलिटिक्स में भारत के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। इस कड़ी में पाक ने रीजनल अलायंस में बदलाव के लिए एक नया प्रपोजल रखा हैं।
पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर इशाक डार ने हाल ही में कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के साथ मिलकर अपनी ट्राईलेटरल पहल को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
पाकिस्तान का प्रपोजल
पिछले हफ्ते पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर डार ने लंबे समय से बंद पड़े साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (SAARC) की जगह एक नई रीजनल बॉडी बनाने की बात कही। पाक विदेश मंत्री का यह बयान भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है।
डार ने दावा किया कि साउथ एशिया अब ‘जीरो-सम माइंडसेट, पॉलिटिकल फ्रैगमेंटेशन और खराब रीजनल आर्किटेक्चर’ में फंसा नहीं रह सकता। उन्होंने एलान किया कि पाकिस्तान खुले और सबको साथ लेकर चलने वाले रीजनल एसोसिएशन बनाने की कोशिश कर रहा है।
डार ने इशारा किया कि पाकिस्तान SAARC के बाहर उभरते मल्टीलेटरल प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करता है और पाकिस्तान एक ऐसे साउथ एशिया की कल्पना करता है जहां ‘बंटवारे की जगह सहयोग ले, इकॉनमी तालमेल से बढ़े, झगड़े इंटरनेशनल लेजिटिमेसी के हिसाब से शांति से हल हों, और जहां शांति इज्जत और सम्मान का साथ बना रहे’।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन ने इस साल की शुरुआत में कॉमन इंटरेस्ट के एरिया में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ट्राइलेटरल सिस्टम बनाया था। इस साल जून में तीनों देशों ने कुनमिंग में एक मीटिंग की थी। हाल के सालों में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच SAARC लगभग खत्म हो गया है।
SAARC क्या है?
SAARC, साउथ एशिया का मुख्य रीजनल ग्रुप है। इसकी स्थापना 1985 में ढाका में एक समिट में हुई थी। इसके सात फाउंडिंग मेंबर हैं।जिसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका शामिल हैं।
2007 में अफगानिस्तान भी इस ब्लॉक का हिस्सा बना था। इसकी वेबसाइट के मुताबिक, ब्लॉक का उद्देश्य साउथ एशिया रीजन में इकोनॉमिक ग्रोथ, सोशल प्रोग्रेस और कल्चरल डेवलपमेंट को बढ़ाना है।
साभार : दैनिक जागरण
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