रविवार, सितंबर 20 2026 | 03:41:37 AM

स्कूल प्रशासन ने रंग लाने पर परीक्षा में बैठने से रोकने की दी चेतावनी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur) के एक स्कूल में बच्चों के होली (Holi) खेलने पर रोक लगा दी गई है, जिसके बाद विवाद बढ़ गया है. राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर (Madan Dilawar) ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करने की बात कही है. मंगलवार सुबह उन्होंने कहा, ‘होली रंगों और श्रद्धा का त्योहार है, जिसे भारत में हर कोई धूमधाम से मनाता है. लेकिन, एक स्कूल में यह आदेश जारी किया गया कि अगर कोई छात्र होली मनाते हुए पाया गया तो उसे परीक्षा देने से रोक दिया जाएगा. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. कोई भी शैक्षणिक संस्थान इस तरह के सांस्कृतिक प्रतिबंध नहीं लगा सकता. हम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को पत्र लिखकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे.’

स्कूल प्रशासन ने पेरेंट्स को भेजा था मैसेज

स्कूल प्रशासन ने पेरेंट्स को एक मैसेज भेजा था, जिसमें कहा गया, ‘होली का त्योहार नजदीक है. हम छात्र-छात्राओं से अनुरोध करते हैं कि वे स्कूल में रंग न लाएं. यह फैसला सभी छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है. अगर, किसी स्टूडेंट के पास रंग पाया गया तो उसे एग्जाम में नहीं बैठने दिया जाएगाा.’ इस नोटिस को पढ़कर अभिभावक नाराज हो गए और कई संगठन भी इस फैसले को भारतीय संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ मानने लगे.

सीबीएसई के फैसले पर सबकी नजर

इस साल होली 14 मार्च को है. यह हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में एक है, जिसे प्यार और रंगों के साथ मनाने के लिए सभी लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. जैसे-जैसे त्योहार की डेट नजदीक आने लगती है, लोगों को उत्साह बढ़ने लगता है. कई शहरों में अलग-अलग परंपराओं से यह त्योहार मनाया जाता है. लेकिन जयपुर के एक स्कूल के फैसले से शुरू हुआ यह विवाद बढ़ता जा रहा है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे व्यावहारिक मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर हमला करार दे रहे हैं. ऐसे में अब सभी की नजर सीबीएसई के फैसले पर टिकी है.

साभार : एनडीटीवी

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।