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भारत के वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ बांग्लादेश में हुआ प्रदर्शन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

ढाका. बांग्लादेश की यूनुस सरकार भारत के खिलाफ गतिविधियां करने से पीछे नहीं हट रही है. वहां हिंदुओं पर हो रही हिंसा के बाद अब बांग्लादेश के कट्टरपंथी भारत के वक्फ कानून का विरोध कर रहे हैं. बांग्लादेश के एक इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन “खिलाफत मजलिस” ने ढाका में भारतीय उच्चायोग के बाहर विरोध-प्रदर्शन की धमकी दी है. संगठन ने कहा है कि 23 अप्रैल को उनके कार्यकर्ता भारतीय उच्चायोग के सामने एक जनसभा करेंगे और वक्फ कानून के खिलाफ आवाज उठाएंगे. इसके साथ ही, वे उच्चायोग के अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपेंगे.

मौलाना ममुनुल हक ने अपने बयान में कही ये बात

पार्टी के अमीर मौलाना ममुनुल हक ने कहा कि भारत में बीजेपी की सरकार काफी समय से मुसलमानों को निशाना बना रही है. उन्होंने मुसलमानों पर अपने कट्टरपंथी हिंदू समर्थकों को छोड़ दिया है. इस दौरान मुसलमानों की ज़मीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है. उनकी निजी और वक्फ की संपत्तियों को छीनकर वहां मंदिर और दूसरी इमारतें बनाई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उनकी लालच खत्म नहीं हुई. अब 2025 का वक्फ संशोधन विधेयक पास किया गया है, जिससे इन ज़मीन कब्जों को कानूनी मंजूरी मिल गई है. हम पहले ही इन फैसलों के खिलाफ अपना विरोध और नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं. भारत के मुसलमान इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. यह विधेयक मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों और नियमों में दखल देता है. मौलाना ममुनुल हक ने कहा कि पूरी मुस्लिम दुनिया को भारत में मुसलमानों के खिलाफ हो रही हिंसा पर आवाज उठानी चाहिए.

‘अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना चाहिए मुद्दा’

उन्होंने कहा कि भारत की सरकार और वहां की कुछ मीडिया बार-बार यह झूठा प्रचार कर रही हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं. असल में भारत में मुसलमानों पर हो रही हिंसा को लेकर बांग्लादेश सरकार की चुप्पी और बेरुखी की वजह से भारत को गलत जानकारी फैलाने का मौका मिल जाता है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार को चाहिए कि वह भारत में मुसलमानों की हत्या और अत्याचार के खिलाफ अपनी चिंता जाहिर करे और इसका विरोध करे. साथ ही इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे कि संयुक्त राष्ट्र में जोरदार तरीके से उठाए.

भारत और बांग्लादेश के बीच बेहतर नहीं है रिश्ते

पिछले साल अगस्त में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, तब से बांग्लादेश में भारत के खिलाफ गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं. पिछले आठ महीनों में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं. इसके साथ ही भारत-बांग्लादेश सीमा के पास बीएसएफ के खिलाफ भी कई विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले हैं. मोहम्मद यूनुस ने भारत के विरोधी देशों चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत करने शुरू कर दिए हैं. उन्होंने चीन की राजधानी बीजिंग में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को लेकर विवादित बयान भी दिया, जिस पर हाल ही में बैंकॉक में बिम्सटेक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सोच-समझकर बोलने की सलाह दी थी. वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाया कि वह देश को आतंकवाद की तरफ धकेल रहे हैं.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।