नई दिल्ली । शनिवार, 30 मई 2026
भारतीय कृषि और देश के अन्नदाताओं की तकदीर बदलने के लिए केंद्र सरकार एक अभूतपूर्व जन आंदोलन की शुरुआत करने जा रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। यह अभियान मात्र एक सरकारी जागरूकता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के खेतों को बंजर होने से बचाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों को मौसम व बाजार के अनुकूल सही सलाह देकर आत्मनिर्भर बनाना है।
इस राष्ट्रीय अभियान की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए व्यापक खाका तैयार किया गया।
‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ पर मुख्य फोकस
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मूल मंत्र “कम खाद, सही खाद और सही सलाह” होगा। वर्तमान में असंतुलित रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizers) के अत्यधिक उपयोग के कारण देश के कई हिस्सों में भूमि की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए अभियान के तहत चार प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा:
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असंतुलित रासायनिक उर्वरकों में कमी: यूरिया और अन्य खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल को नियंत्रित करना।
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मृदा स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Health Test): मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आवश्यक पोषक तत्व खेतों में डालना।
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जैविक और जैव-उत्पादों को बढ़ावा: रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में जैविक खाद और पर्यावरण-अनुकूल जैव-उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
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एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM): पारंपरिक और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों के समन्वय से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना।
पंचायत स्तर से तैयार होगा जन आंदोलन
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे ऊपर से थोपने के बजाय जमीनी स्तर से संचालित किया जाएगा। कृषि मंत्री के अनुसार, देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत इस आंदोलन का केंद्र बनेगी। अभियान को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित संस्थाएं कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगी:
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स्थानीय ग्राम पंचायतें एवं जनप्रतिनिधि
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कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
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राज्य सरकारें और उनके कृषि विभाग
मौसम की चुनौतियां और 1600+ विशेषज्ञ टीमों का चक्रव्यूह
जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों को व्यावहारिक सलाह देना इस अभियान का एक अनिवार्य हिस्सा है। कृषि मंत्री ने निर्देश दिया है कि किसानों को फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाने, कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने और कृषि में जोखिम प्रबंधन (Risk Management) के गुर सिखाए जाएं।
इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए देश भर में 1600 से अधिक विशेष टीमें गठित की जा रही हैं। जिन जिलों में उर्वरकों का उपयोग अत्यधिक होता है, वहां 500 विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, ICAR और KVK की 1150 से अधिक टीमें गांव-गांव जाकर किसानों का मार्गदर्शन करेंगी।
अभियान के दौरान मिलने वाले प्रमुख लाभ और गतिविधियां
एक महीने तक चलने वाले इस सघन अभियान के दौरान पंचायतों में कैंप लगाकर किसानों को सीधे सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा:
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सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) व किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का त्वरित वितरण।
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मशीनरी वितरण और आधुनिक कृषि यंत्रों तक किसानों की पहुंच।
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पीएम-किसान योजना (PM-KISAN) से वंचित रह गए पात्र लाभार्थियों को जोड़ना।
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दलहन-तिलहन मिशन को गति देना ताकि देश खाद्य तेलों और दालों में आत्मनिर्भर बन सके।
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जल संरक्षण के लिए खेतों में ‘कैच द रेन’ और मेड़बंदी जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना।
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