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कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में बदलाव की संभावना, सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार दोनों दिल्ली में

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बेंगलुरु. कर्नाटक की राजनीति इन दिनों फिर उफान पर है. मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की दिल्ली यात्रा ने सियासी गलियारों में गर्मी और बढ़ा दी है. दोनों नेता भले ही कपिल सिब्बल की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में आए हों, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर असल में उनके बंद कमरों में होने वाली बैठकों पर टिकी है.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दिल्ली पहुंचते ही राहुल गांधी से मुलाकात की और बिहार चुनाव में कांग्रेस को लगे बड़े झटके पर लंबी चर्चा हुई. सिद्धारमैया ने खुद कहा, “राहुल हमारे नेता हैं, हमने उन्हें उत्साहित किया. बिहार में जो हुआ, उसके बावजूद वे निराश नहीं हैं.” लेकिन उन्होंने कैबिनेट फेरबदल पर चर्चा की बात पूरी तरह खारिज कर दी. साथ ही यह भी इशारा दिया कि समय मिला तो वे सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिल सकते हैं… एक टिप्पणी जिसने सियासी विश्लेषकों की भौहें और चढ़ा दी हैं.
दूसरी तरफ, डी.के. शिवकुमार ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कई सवालों को गोल कर दिया. उन्होंने कहा, “मुझे राहुल गांधी और मुख्यमंत्री की बैठक की कोई जानकारी नहीं है… नेतृत्व परिवर्तन पर कुछ पूछना है तो सीधी बात मुख्यमंत्री से करें.” यानी उनकी बातों में न पुष्टि है, न खंडन… बस राजनीतिक संकेतों का धुंआ. साफ है, कर्नाटक कांग्रेस में शक्ति संतुलन एक बार फिर हलचल में है. दिल्ली में हुई मुलाकातें चाहे ‘पुस्तक विमोचन’ के नाम पर हों, लेकिन उनका राजनीतिक असर आने वाले दिनों में राज्य की सत्ता संरचना पर गहरा पड़ सकता है.
सिद्धारमैया द्वारा अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने पर जोर दिए जाने के साथ शिवकुमार की नई दिल्ली में उपस्थिति से नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा फिर से तेज हो गई है. मंत्री ज़मीर अहमद खान के अनुसार, कोई ‘नवंबर क्रांति’ नहीं होगी. ‘नवंबर क्रांति’ शब्द मंत्री के एन राजन्ना ने दिया था, जिन्होंने संकेत दिया था कि सरकार में बड़ा बदलाव होगा. अनुमान लगाया जा रहा था कि उनका इशारा राज्य में सत्ता परिवर्तन की ओर था.
मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा शुरू होते ही कई कांग्रेस विधायकों ने मंत्री पद हासिल करने के लिए अपनी पैरवी शुरू कर दी है. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि विधायक एन ए हैरिस, रिजवान अरशद, बी के हरिप्रसाद, बेलूर गोपालकृष्ण, एचसी बालकृष्ण, बेलूर गोपालकृष्ण, सलीम अहमद, आर वी देशपांडे, प्रसाद अब्बय्या नागेंद्र, एम कृष्णप्पा, लक्ष्मण सावदी, ए एस पोन्नन्ना, शिवालिंगे गौड़ा और रूपकला शशिधर और मलूर नांजेगौड़ा मंत्री पद के शीर्ष दावेदारों में से हैं.
साभार : न्यूज18

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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