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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ को बताया मृत्यु कुंभ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जारी महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ को मृत्यु कुंभ बताया है। ममता बनर्जी ने कहा कि ये अब महाकुंभ नहीं रहा, मृत्यु कुंभ हो गया है। ममता बनर्जी ने विधानसभा में बोलते हुए सरकार पर महाकुंभ में कोई इंतजाम नहीं करने का आरोप लगाया है। आइए जानते हैं कि ममता बनर्जी ने और क्या कुछ कहा है।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ को लेकर कहा कि ये अब महाकुंभ नहीं रहा। मृत्युकुंभ हो गया है। महाकुंभ के प्रति पूरा सम्मान, श्रृद्धा है। पवित्र मां गंगा के प्रति पूरा सम्मान है लेकिन इन्होंने क्या किया। कोई प्लानिंग नहीं की, सिर्फ हाईप क्रिएट की, कितने लोगों की मौत हो गई है।

सरकार ने कुंभ के लिए कोई इंतज़ाम नहीं किए- ममता

ममता बनर्जी ने कहा कि वो महाकुंभ और मां गंगा का सम्मान करती हैं लेकिन हकीकत ये है कि सरकार ने कुंभ के लिए कोई इंतज़ाम नहीं किए। इसलिए इतने लोगों की मौत हुई। ममता बनर्जी ने कहा कि अमीरों के लिए स्पेशल कैम्प बनाए गए हैं, उनका किराया एक लाख रूपये रोजाना का है लेकिन गरीबों के लिए कोई व्यवस्था नहीं। ममता ने कहा कि इस तरह के मेलों में भगदड़ की आशंका हमेशा रहती है लेकिन इस बार सरकार ने कोई इंतजाम नहीं किए।

महाकुंभ में कितने लोगों ने स्नान किया?

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भव्य महाकुंभ का आयोजन जारी है। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के मुताबिक, सोमवार 17 फरवरी तक 54.31 करोड़ लोगों ने महाकुंभ में स्नान कर लिया है। बता दें कि महाकुंभ में 40 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभवना जताई गई था। हालांकि, ये आंकड़ा काफी आगे चला गया है। महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ था। इसका समापन 26 फरवरी 2025 को होगा।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।