मुंबई. भारत में नई पीढ़ी के कारोबारियों की ताकत अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगी है. आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट बैंकिंग और हुरुन इंडिया की तरफ से जारी टॉप 200 सेल्फ मेड एंटरप्रेन्योर ऑफ द मिलेनिया 2025 रिपोर्ट में इटरनल (जोमैटो की पेरेंट कंपनी) के संस्थापक दीपिंदर गोयल (Deepinder Goyal) देश के सबसे बड़े सेल्फ मेड एंटरप्रेन्योर बनकर उभरे हैं. उनकी कंपनी की वैल्यूएशन 27 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ 3.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.
पिछले साल इस लिस्ट में नंबर 1 रहे एवेन्यू सुपरमार्ट्स (डी-मार्ट की पेरेंट कंपनी) के राधाकिशन डैमानी (Radhakishan Damani) इस बार दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं. उनकी कंपनी की वैल्यूएशन सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटकर 3 लाख करोड़ रुपये रह गई है. यह बदलाव दिखाता है कि भारत की एंटरप्रेन्योरशिप कहानी अब पारंपरिक रिटेल से आगे बढ़कर टेक और कंज्यूमर प्लेटफॉर्म्स की तरफ तेजी से झुक रही है.
टॉप 3 में एविएशन सेक्टर की एंट्री
इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इंटरग्लोब एविएशन के संस्थापकों राहुल भाटिया (Rahul Bhatia) और राकेश गंगवाल (Rakesh Gangwal) की दमदार एंट्री रही है. दोनों सीधे टॉप 3 में पहुंचे हैं, जहां उनकी कंपनी की वैल्यूएशन 2.2 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक इंटरग्लोब एविएशन न सिर्फ वैल्यूएशन के लिहाज से मजबूत है, बल्कि टॉप 200 कंपनियों में रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों के मामले में भी सबसे आगे है. यह भारत के एविएशन सेक्टर की बढ़ती स्केल और मुनाफे की क्षमता को दिखाता है.
42 लाख करोड़ रुपये की नई वेल्थ क्रिएशन
रिपोर्ट के अनुसार 2000 के बाद शुरू हुई टॉप 200 सेल्फ मेड कंपनियों का कुल मूल्य सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़कर 42 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. सिर्फ एक साल में 6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब ग्लोबल स्तर पर लिक्विडिटी टाइट है और स्टार्टअप फंडिंग को लेकर माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. इसके बावजूद भारतीय कंपनियों की ग्रोथ यह बताती है कि घरेलू बाजार की ताकत लगातार बढ़ रही है.
इस लिस्ट में अब 128 कंपनियां ऐसी हैं जिनकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा है, यानी करीब 8,300 करोड़ रुपये से ऊपर. यह संख्या पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है और भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम की गहराई को दिखाती है.
पेटीएम और लेंसकार्ट की जबरदस्त छलांग
रिपोर्ट में पेटीएम (Paytm) और लेंसकार्ट (Lenskart) की तेजी खास तौर पर सामने आई है. पेटीएम की वैल्यूएशन में 67 प्रतिशत और लेंसकार्ट की वैल्यूएशन में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे दोनों कंपनियां टॉप 10 में शामिल हो गई हैं. दूसरी तरफ रेजरपे (Razorpay) और जीरोधा (Zerodha) टॉप 10 से बाहर हो गए हैं, जो यह संकेत देता है कि वैल्यूएशन का खेल तेजी से बदल रहा है.
अब टॉप 10 में जगह बनाने के लिए किसी कंपनी की वैल्यूएशन कम से कम 67,000 करोड़ रुपये होनी जरूरी हो गई है, जो पिछले साल 56,600 करोड़ रुपये थी.
कहां से आ रही है अगली बड़ी ग्रोथ
सबसे तेज बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियों में एंथम बायोसाइंसेज (Anthem Biosciences), ग्रो (Groww) और जंबोटेल (Jumbotail) शामिल हैं. एंथम बायोसाइंसेज की वैल्यूएशन 273 प्रतिशत बढ़कर 45,200 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जबकि ग्रो में 148 प्रतिशत और जंबोटेल में 147 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक अगली लहर फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, क्विक कॉमर्स, हेल्थ साइंसेज, स्पेशलिटी केमिकल्स और डिजिटल कंज्यूमर प्लेटफॉर्म्स से आने की उम्मीद है.
स्टार्टअप हब के रूप में बेंगलुरु सबसे आगे
शहरों की बात करें तो बेंगलुरु भारत की स्टार्टअप कैपिटल बना हुआ है. इस लिस्ट में सबसे ज्यादा 52 कंपनियों का हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है. इसके बाद मुंबई में 41 और गुरुग्राम में 36 कंपनियां शामिल हैं. संस्थापकों के रहने के लिहाज से भी बेंगलुरु सबसे आगे है, जहां 88 एंटरप्रेन्योर रहते हैं, जबकि मुंबई में 83 और नई दिल्ली में 52 संस्थापक रहते हैं.
साभार : न्यूज18
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