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वक्फ संशोधन कानून पर असदुद्दीन ओवैसी भी कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट की अवमानना : मौलाना साजिद रशीदी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर बवाल मचा हुआ है. हर तरफ उनकी आलोचना की जा रही है, यहां तक कि बीजेपी ने भी उनके बयान से अपना पल्ला झाड़ लिया है. मामले पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि ऐसी टिप्पणी असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया में आती हैं. उन्होंने कहा, “जब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है तो असदुद्दीन ओवैसी को भी ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए. ओवैसी बोल रहे हैं कि सड़कों पर आ जाओ तो ऐसा बोलकर क्या वह भी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं कर रहे हैं. ऐसी बयानबाजी ओवैसी के बयान की प्रतिक्रिया पर आती है.”

‘नहीं करनी चाहिए न्यायपालिका पर टिप्पणी’

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नेताओं को इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए. मौलाना ने कहा, “न्यायपालिका पर टिप्पणी करना इतना आसान नहीं है. सत्ता पक्ष के लोगों को न्यायपालिका पर इस तरह से नहीं बोलना चाहिए. इस तरह की टिपण्णी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर सत्ता पक्ष भी इस तरह की बातें करेगा तो विपक्ष क्या बोलेगा. बिना वजह की ऐसी टिपण्णी करने से पार्टी का ग्राफ नीचे जाता है.”

‘ऐसी टिप्पणियों से मुलसमान हो जाएंगे बीजेपी से दूर’

मौलाना साजिद रशीदी ने ये भी कहा, “निशिकांत दुबे का अपने क्षेत्र में कोई जनाधार नहीं है लेकिन इस तरह के बयानबजी से पार्टी को नुकसान होगा. निशिकांत दुबे आये दिन मुसलमानों पर भी ऐसी बातें करते रहते हैं. निशिकांत दुबे पर कारवाई होनी चाहिए. देश का मुसलमान आज बीजेपी की और देख रहा है अगर ऐसी टिपण्णी की जाएगी तो मुसलमान बीजेपी से और दूर जाएगा.”

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।